हरिजन अत्याचार अधिनियम में चार को दो-दो वर्ष की सजा
Updated at : 10 Aug 2019 1:14 AM (IST)
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मधुबनी :प्रथम एडीजे सह विशेष न्यायाधीश मो. इशरत उल्लाह के न्यायालय में हरिजन अत्याचार मामले की सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष के बहस के बाद बिस्फी थाना क्षेत्र के चहुटा निवासी आरोपी नागेन्द्र दास, कुशेश्वरी देवी, महेन्द्र दास एवं खजौली थाना क्षेत्र के घुसकीपट्टी निवासी विनोद दास को हरिजन अत्याचार अघिनियम की धारा 3(1) […]
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मधुबनी :प्रथम एडीजे सह विशेष न्यायाधीश मो. इशरत उल्लाह के न्यायालय में हरिजन अत्याचार मामले की सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष के बहस के बाद बिस्फी थाना क्षेत्र के चहुटा निवासी आरोपी नागेन्द्र दास, कुशेश्वरी देवी, महेन्द्र दास एवं खजौली थाना क्षेत्र के घुसकीपट्टी निवासी विनोद दास को हरिजन अत्याचार अघिनियम की धारा 3(1) (v)एवं 3(1) (x) में दो दो वर्ष कारावास की सजा सुनायी है.
साथ ही न्यायालय ने प्रत्येक को पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है. जुर्माने कि राशि नहीं देने पर तीन-तीन माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. वहीं अन्य दफा 427 भादवि में भी एक वर्ष कि सजा सुनायी गयी है. न्यायालय में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक सपन कुमार सिंह ने बहस करते हुए न्यायालय से अधिक से अधिक सजा देने की मांग की थी. वहीं बचाव पक्ष से अधिवक्ता अरुण कुमार झा ने बहस की थी.
क्या है मामला. अभियोजन के अनुसार सूचक जामुन पासवान सल्हेस स्थान की देखरेख करते आ रहा था. लेकिन उक्त आरोपियों द्वारा 10 सितंबर 1997 को लाठी, भाला, गड़ासे से लैस होकर आया और कुदाल से गहवर में तोड़ फोड़ करने लगा. साथ ही जमीन को खोदने लगा. सूचक द्वारा मना करने पर आरोपी ने सूचक जामुन पासवान के गले में गमछा लगा कर जाति सूचक गाली देते हुए मारपीट की थी. इस बाबत सूचक द्वारा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में 11 सितंबर 1997 को परिवाद दायर किया था.
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