विक्रमशिला सेतु संकट के बीच नया खतरा, एमएलसी ने जताई चिंता

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 05 Jun 2026 12:31 PM

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नावों से सफर बढ़ा तो गंगा में बढ़ने लगा प्लास्टिक,एमएलसी ने जताई चिंता

Vikramshila Bridge: नावों से सफर बढ़ा तो गंगा में बढ़ने लगा प्लास्टिक,जैव-विविधता पर मंडराया संकट

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Vikramshila Bridge: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद जहां भागलपुर और नौगछिया के बीच लोगों की आवाजाही के लिए नौका परिचालन बढ़ गया है, अब गंगा नदी के सामने एक नई पर्यावरणीय चुनौती खड़ी हो गई है. विधान परिषद सदस्य डॉ अजय कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि बढ़ते नौका परिचालन के साथ गंगा में प्लास्टिक कचरा तेजी से फेंके जा रहे हैं, जिससे नदी की स्वच्छता और जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा गहराने लगा है.

गंगा में फेंका जा रहा प्लास्टिक, बढ़ी चिंता

डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री पानी की बोतलें, पॉलीथिन और अन्य उपयोगी सामग्री गंगा में फेंक रहे हैं. यह प्रवृत्ति केवल नदी को प्रदूषित नहीं कर रही, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रही है. उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

डॉल्फिन अभ्यारण्य पर मंडरा रहा खतरा

सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि यह क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में शामिल विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य के दायरे में आता है. यहां विलुप्तप्राय गांगेय डॉल्फिन, उदबिलाव और कई अन्य जलीय जीव पाए जाते हैं. गंगा में बढ़ता प्लास्टिक कचरा इन जीवों के प्राकृतिक आवास और जीवन चक्र को प्रभावित कर सकता है.

डॉ सिंह ने कहा कि सरकार डॉल्फिन संरक्षण और गंगा की जैव-विविधता को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन लोगों की लापरवाही इन प्रयासों को कमजोर कर रही है.

प्रशासन से की ठोस कदम उठाने की मांग

एमएलसी ने प्रशासन से घाटों पर पर्याप्त संख्या में कूड़ादान लगाने, सफाई व्यवस्था मजबूत करने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि नौका परिचालन वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए ताकि लोग नदी में कचरा फेंकने से बचें.

गंगा को बचाना सबकी जिम्मेदारी

डॉ अजय कुमार सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का आधार है. विक्रमशिला सेतु का पुनर्निर्माण भविष्य में हो जाएगा, लेकिन यदि गंगा की जैव-विविधता को नुकसान पहुंचा तो उसकी भरपाई करना बेहद कठिन होगा. इसलिए हर नागरिक को गंगा की स्वच्छता और संरक्षण के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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