मधेपुरा. उर्दू परामर्शदातृ समिति बिहार के सदस्य सह पीएमडीआरएफ के निदेशक प्रो फिरोज मंसूरी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उर्दू भाषा के प्रति विशेष अनुराग सर्वविदित है. उनके दूरदर्शी, समावेशी व करुणामय नेतृत्व में बिहार सरकार उर्दू भाषा के संरक्षण, संवर्धन व विकास के लिए निरंतर ठोस और प्रभावी कदम उठा रही है. उर्दू भाषा को जन-जन तक, विशेषकर गांव–गांव तक पहुंचाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. इसी क्रम में बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय के अंतर्गत आयोजित उर्दू परामर्शदातृ समिति की बैठक में अध्यक्ष व समिति के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण सुझावों को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया. इन स्वीकृत सुझावों के आलोक में राज्य में उर्दू भाषा के विकास के लिए कई निर्णय लिये गये हैं. स्वीकृत निर्णयों के अनुसार जिला स्तर पर आयोजित होने वाले उर्दू कार्यक्रमों जैसे सेमिनार, मुशायरा, वाद-विवाद, संगोष्ठी आदि में उर्दू परामर्शदातृ समिति के अध्यक्ष व सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी. जिलों में पदस्थापित उर्दू शिक्षकों को उर्दू से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए दिशा-निर्देश निर्गत किये जायेंगे. उर्दू भाषी नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में उर्दू भाषा में आवेदन प्रस्तुत करने के लिए जागरूक करने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जायेगा. ये निर्णय बिहार में उर्दू भाषा को द्वितीय राजभाषा के रूप में व अधिक सशक्त, प्रभावी व व्यवहारिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल हैं. इससे न केवल उर्दू भाषा को संस्थागत मजबूती मिलेगी, बल्कि उर्दू भाषी समाज में भी आत्मसम्मान और सहभागिता की भावना और प्रबल होगी. उर्दू परामर्शदातृ समिति के अध्यक्ष व सदस्य के रूप में हम सभी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति हृदय से आभार व कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनके नेतृत्व में उर्दू भाषा को नया सम्मान, नई ऊर्जा और नई दिशा प्राप्त हो रही है.
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