– कोसी में गन्ना किसानों को नहीं मिल रही बेहतर कीमत, विमुख हो रहे किसान-
– बंद चीनी मिल ने कम की किसानों की जिंदगी की मिठास-
– बनमनखी चीनी मिल बंद होने से उदाकिशुनगंज क्षेत्र के किसानों ने गन्ना उत्पादन से मुंह मोड़ा-
कौनैन बसीर
उदाकिशुनगंज
अनुमंडल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है. बिना किसी सरकारी मदद एवं प्रशिक्षण के ही यहां के किसान गन्ने की अच्छी पैदावार करते हैं. लेकिन किसानों को मेहनत के अनुकूल गन्ने की उचित कीमत नहीं मिल रही है. इस कारण किसानों के खून पसीने की मेहनत बेकार चली जाती है. हर बार किसानों को कीमत के मामले में निराश होना पड़ता है. इसकी वजह चीनी मिल का नहीं होना बताया जा रहा है. किसानों का मानना है कि यदि खेती के लिये प्रशिक्षण मिले तो आधुनिक तरीके की खेती से और उपज बढ़ेगी वहीं मिल स्थापित होने से गन्ने का उचित मूल्य प्राप्त होगा. गन्ना किसानों के प्रति सरकार उदासीन है.– 10 हजार हेक्टेयर भूमि में होती है खेती –
2005 के विभागीय सर्वे के मुताबिक उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र के बड़े भू-भाग पर गन्ने की खेती की जाती है. आकड़ों के मुताबिक क्षेत्र में 10 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती होती है. इस क्षेत्र के किसानों की परंपरागत खेती होती थी. जो सदियों से पूर्वजों द्वारा खेती की जाती रही है. लेकिन अब गन्ना से किसान विमुख होने लगे.– गन्ना किसानों को सरकारी मदद की दरकार –
आम तौर पर सामान्य फसलों के लिए राज्य सरकार ने कृषि रोड मैप तैयार किया है. जहा प्रशिक्षण से लेकर उपकरण, उन्नत किस्म के बीज, खाद तक उपलब्ध कराये जाते है. लेकिन कोसी के गन्ना किसानों को यह सुविधा मयस्यर नहीं है. हालांकि बताया जाता है कि अनुमंडल मुख्यालय में एक निजी मकान में किराये पर गन्ना विभाग का कार्यालय चला करता है, लेकिन अधिकारियों के दर्शन आज तक किसानों को नहीं हुआ. प्रमंडलीय स्तर पर भी कार्यलय है. जानकारी के अनुसार गन्ना किसानों को भी प्रशिक्षित किये जाने का प्रावधान है. किसानों को तकनीकी खेती की जानकारी दिया जाना है. किसानों को विभाग द्वारा उन्नत प्रभेद के बीज भी उपलब्ध कराया जाना है. इसके लिए अलग तौर पर गन्ना विभाग का कार्यालय है. लेकिन किसान व्यवस्था के अभाव में प्रशिक्षित नहीं हो पाते है. एक ओर जनप्रतिनिधियों ने उदाकिशुनगंज में कई बार चीनी मिल खोलने की बात की लेकिन नतीजा सिफर निकला, सरकार की बेरूखी के कारण उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में गन्ने की मिठास नगण्य हो चुकी है. किसान गन्ने की खेती से विमुख होते जा रहे हैं. मालूम हो कि पूर्णिया जिले के बनमनखी में जब चीनी मिल सक्रिय थी तब बिहारीगंज स्टेशन पर मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र से पर्याप्त मात्रा में मिल को गन्ने की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन चीनी मिल के बंद हो जाने के बाद इस क्षेत्र के गन्ना किसानों ने सरकार के बेरुखी के कारण गन्ने की खेती काफी कम कर दी. अब जो खेती हो रही है उससे गुड़ बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. पूर्व उद्योग मंत्री रेणु कुमारी कुशवाहा ने इस क्षेत्र में चीनी मिल की स्थापना के लिए प्रयास किया, बिहारीगंज-उदाकिशुनगंज पथ पर मधुबन गांव के समीप भूमि का सर्वे कर चीनी मिल स्थापित करने की योजना बनायी गयी तो किसानों में खुशी की लहर दौड़ गयी थी. लेकिन वह योजना भी फाइलों में सिमट कर रह गयी. बताया जाता है कि भूमि अधिग्रहण के काम का कुछ किसानों ने विरोध जता दिया था. हालांकि वहीं लोगों का यह भी कहना है कि मिल के लिये अनुमंडल क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भी जमीन उपलब्ध थी. लेकिन इस दिशा में ईमानदारी से प्रयास नहीं किया गया अन्यथा भूमि उपलब्ध होना कोई बड़ी बात नहीं थी. किन्ही खास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ही मिल की योजना बनायी गयी थी.– कहते हैं किसान –
समय-समय पर किसानों को कई बार प्रशिक्षण भी दिया गया, लेकिन चीनी मिल नहीं होने के कारण यह प्रशिक्षण भी नाकाम साबित होता रहा. क्षेत्र के किसान राजेंद्र कुमार सिंह, पप्पू यादव, लड्डू उर्फ अखलाक आलम, संजीव यादव, गोपाल कुमार, बासू यादव, शंभु राय,संजय सिंह,विनोद मंडल,अजय कुमार,रोशन मेहता आदि ने बताया कि सिर्फ प्रशिक्षण से क्या होगा. एक समय था गन्ने की खेती से ही परिवार का भरण पोषण हुआ करता था. लेकिन वह समय अब चला गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

