मधेपुरा में अब तक किसी को नहीं मिली टिकट की हरी झंडी

मधेपुरा में अब तक किसी को नहीं मिली टिकट की हरी झंडी
दिनभर चलता रहा कयासों का दौर, 10 अक्तूबर से शुरू होगा नामांकन मधेपुरा. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आहट के साथ जिले की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गयी है. जिले की चारों विधानसभा सीटों मधेपुरा, सिंहेश्वर (सुरक्षित), आलमनगर व बिहारीगंज पर नेताओं की निगाहें टिकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी दल ने किसी भी सीट से अपने प्रत्याशी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. पूरे दिनभर टिकट को लेकर चर्चाओं व अटकलों का बाजार गर्म रहा. सुबह से लेकर देर शाम तक राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा रही कि आखिर किसे मिलेगा टिकट. कुछ नाम सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे, तो कुछ नेताओं के समर्थक अपने नेता के पक्ष में माहौल बनाते दिखे. इसके बावजूद अब तक किसी भी पार्टी ने अधिकृत रूप से किसी उम्मीदवार के नाम पर मुहर नहीं लगायी है. हर दल के भीतर मंथन जारी जानकारों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की सीट बंटवारे की कवायद जारी है, जिसका असर जिले की चारों सीटों पर भी दिख रहा है. राजद, जदयू और कांग्रेस सभी अपने-अपने मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में जुटे हैं. राजद खेमे में मधेपुरा से मौजूदा विधायक या दल के कई नाम पर चर्चा है, वहीं जनसुराज में शिक्षित चेहरा उतारने की बात कही जा रही है. जदयू संगठनात्मक रिपोर्ट के आधार पर संभावित नामों पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस अभी बिहारीगंज सीट हासिल करने में ही जुटी हुई है. टिकट की उम्मीद में दौड़-धूप संभावित उम्मीदवार लगातार पटना और जिला मुख्यालय के बीच चक्कर लगा रहे हैं. कई नेता तो दिल्ली तक संपर्क साधने की कोशिशों में हैं. कार्यकर्ताओं में भी बेचैनी है. सबको अपने नेता के टिकट की घोषणा का इंतजार है ताकि प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत की जा सके. नामांकन की तैयारी तेज, लेकिन चेहरे अनिश्चित जिला प्रशासन ने नामांकन की तैयारी पूरी कर ली है. 10 अक्तूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 अक्तूबर तक चलेगी. सुरक्षा, दस्तावेज जांच और नामांकन केंद्रों पर निगरानी की व्यवस्था की जा रही है. वहीं मतदाताओं के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इस बार कौन किस पार्टी से मैदान में उतरेगा. स्थानीय लोगों की राय शहर के कॉलेज चौक पर बैठे बुजुर्ग मतदाता रमेश यादव ने कहा कि हर बार आखिरी वक्त में टिकट मिलता है. जनता को जानने का वक्त ही नहीं मिलता कि उम्मीदवार कौन है. वहीं, युवाओं का कहना है कि उम्मीदवार वही होना चाहिए जो विकास की बात करे, सिर्फ जाति और पार्टी नहीं. फिलहाल, जिले की राजनीतिक तस्वीर धुंधली है. नामांकन की तारीख नजदीक आते ही अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मधेपुरा की चारों सीटों पर किसे मिलेगी टिकट की अंतिम हरी झंडी.
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