मधेपुरा के सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण बना मुसीबत, हर दिन जाम में फंस रहे लोग

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 02 Jun 2026 10:59 AM

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शहर की सड़कों पर अतिक्रमण से जाम के समस्या से परेशान लोग

Madhepura News: क्या मधेपुरा शहर की सड़कों पर चलना अब मुश्किल होता जा रहा है? सड़क किनारे बढ़ते अतिक्रमण, फुटकर दुकानों और बेतरतीब पार्किंग ने यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि रोजाना हजारों लोगों को जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है.

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मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट

Madhepura News: मधेपुरा शहर में सड़क किनारे बढ़ते अतिक्रमण ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. शहर की मुख्य सड़कों पर फुटकर दुकानों, ठेलों और अवैध पार्किंग के कारण जाम की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. सड़क के दोनों किनारों पर अस्थायी दुकानें लगने और ग्राहकों द्वारा वाहन सड़क पर खड़े कर देने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

हर दिन जाम का संकट

शहर के स्टेशन चौक से कर्पूरी चौक, पूर्णिया गोला चौक, पुरानी कचहरी चौक, सुभाष चौक और कॉलेज चौक तक सड़क किनारे बड़ी संख्या में फुटकर दुकानें संचालित हो रही हैं. ट्रैफिक का दबाव बढ़ते ही इन इलाकों में जाम लगना आम बात हो गई है.

विशेष रूप से पुरानी कचहरी चौक से एसएनपीएम प्लस टू विद्यालय तक की सड़क पर दोनों ओर सब्जी विक्रेताओं और ठेला चालकों का कब्जा बना रहता है. दोपहर से देर रात तक सड़क किनारे लगी दुकानों के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

अतिक्रमण से बढ़ा दुर्घटना का खतरा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क संकरी होने और भीड़भाड़ बढ़ने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना रहता है. कई जगहों पर सड़क का बड़ा हिस्सा दुकानदारों और अस्थायी कारोबारियों के कब्जे में है, जिससे वाहनों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती.

कॉलेज चौक से बीपी मंडल चौक (पुराना बस स्टैंड) जाने वाली सड़क पर भी अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.

सीमांकन के बावजूद जारी है कब्जा

स्थानीय लोगों के अनुसार नगर परिषद द्वारा नाला निर्माण के बाद कई दुकानदार नाले के अंदर की जमीन को अपना हिस्सा मानकर उपयोग कर रहे हैं. जबकि पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा सड़क किनारे कई स्थानों पर पिलर लगाकर सीमांकन किया जा चुका है.

इसके बावजूद सरकारी जमीन पर अतिक्रमण जारी है. फल विक्रेताओं, ठेला चालकों और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण पुरानी कचहरी और पूर्णिया गोला चौक जैसे क्षेत्रों में जाम की समस्या सबसे अधिक देखने को मिल रही है.

कार्रवाई की मांग तेज

शहरवासियों ने प्रशासन और नगर परिषद से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि जब तक सड़क किनारे अवैध कब्जों और अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक जाम की समस्या से राहत मिलना मुश्किल है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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