मधेपुरा नगर परिषद में टेंडर का खेल: कार्यपालक अधिकारी और दो कर्मचारियों पर लगे गंभीर आरोप, सीएम से संपत्ति जांच की मांग
मधेपुरा नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों के बाद CM से उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी है. योजनाओं और भुगतानों में अनियमितताओं के आरोप.
Madhepura News: बिहार के मधेपुरा शहर के विकास और साफ-सफाई की जिम्मेदारी जिस नगर परिषद के कंधों पर है, वही इन दिनों वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी के गंभीर आरोपों के भंवर में फंस गया है. मधेपुरा नगर परिषद में सरकारी फंड के उपयोग और विकास योजनाओं के आवंटन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है. नगर परिषद की कार्यपालक अधिकारी तान्या कुमारी की कार्यशैली और उनके कार्यकाल के दौरान हुई करोड़ों की टेंडर प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए शिकायत का पुलिंदा सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दरबार तक पहुंचा दिया गया है. इस हाई-प्रोफाइल शिकायत के बाद नगर परिषद महकमे से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में हड़कंप मच गया है.
टेंडर आवंटन में मनमानी और संवेदकों पर दबाव बनाने का आरोप
मधेपुरा के स्थानीय संवेदक अमित कुमार और समाजसेवी दीपक कुमार ने मीडिया के सामने आकर नगर परिषद प्रशासन की पोल खोली है. उन्होंने आरोप लगाया है कि जुलाई 2023 से पदस्थापित कार्यपालक अधिकारी तान्या कुमारी के कार्यकाल में शहर के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की निविदा प्रक्रिया में व्यापक गड़बड़ी की गई है. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पसंदीदा संवेदकों को काम दिलाने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया और ठेकेदारों पर अनुचित दबाव बनाया गया. इस वजह से न केवल शहर की गुणवत्तापूर्ण विकास योजनाएं प्रभावित हुईं, बल्कि स्थानीय टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई के गलत इस्तेमाल का अंदेशा भी बढ़ गया है.
कंप्यूटर ऑपरेटर और क्लर्क की भूमिका पर भी उठे सवाल, संपत्ति जांच की मांग
इस पूरे मामले में केवल कार्यपालक अधिकारी ही नहीं, बल्कि उनके दो करीबी माने जाने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है. शिकायतकर्ताओं ने नगर परिषद में लंबे समय से जमे कंप्यूटर ऑपरेटर मानव कुमार कृष्णमूर्ति और क्लर्क दीपक कुमार का नाम उजागर करते हुए उनकी भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में कहा गया है कि ये दोनों कर्मचारी अधिकारी के बेहद करीबी हैं और टेंडर से लेकर भुगतान प्रक्रिया तक में इनका गहरा दखल रहता है. दोनों शिकायतकर्ताओं ने आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और निगरानी विभाग से कार्यपालक अधिकारी सहित इन दोनों कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति की गहन जांच कराने की गुहार लगाई है.
तीन साल के कार्यकाल पर उठे सवाल, ईओयू और निगरानी विभाग तक पहुंची फाइल
शिकायतकर्ताओं ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया है कि मधेपुरा नगर परिषद में तीन वर्षों से अधिक समय से पदस्थापित होने के बावजूद कार्यपालक अधिकारी का तबादला अब तक क्यों नहीं किया गया. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के अलावा बिहार के मुख्य सचिव, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, निगरानी विभाग और जिलाधिकारी मधेपुरा को भी आवेदन की प्रतिलिपि भेजी है. उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बिना नगर परिषद में चल रहे इस कथित खेल पर विराम नहीं लग सकता है.
'बिना साक्ष्य के आरोप बेबुनियाद', आरोपों पर कार्यपालक अधिकारी की सफाई
दूसरी तरफ इन गंभीर आरोपों पर जब मधेपुरा नगर परिषद की कार्यपालक अधिकारी तान्या कुमारी से पक्ष पूछा गया, तो उन्होंने पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. उन्होंने संक्षिप्त रूप से कहा कि इस मामले में फिलहाल उन्हें कुछ नहीं कहना है. उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर आरोप लगाने के लिए पुख्ता साक्ष्य होने चाहिए. बिना किसी सबूत के लगाए जा रहे आरोपों पर टिप्पणी करना उचित नहीं है. उन्होंने साफ किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी सही निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.
Madhepura News: आम जनता पर असर और प्रशासनिक जवाबदेही की दरकार
नगर परिषद में मचे इस घमासान का सीधा असर मधेपुरा शहर की सड़कों, नालियों और नागरिक सुविधाओं पर पड़ रहा है. जब प्रशासनिक मशीनरी विवादों और जांच के चक्रव्यूह में उलझ जाती है, तो आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री सचिवालय और नगर विकास विभाग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है. क्या मधेपुरा नगर परिषद में पारदर्शी जांच के आदेश दिए जाते हैं या फिर विवाद ऐसे ही सुलगता रहेगा.

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