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हिंदी भारतीय संस्कृति की प्रतिनिधित्व करने वाली है भाषा : कुलपति

Updated at : 14 Sep 2024 9:50 PM (IST)
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हिंदी भारतीय संस्कृति की प्रतिनिधित्व करने वाली है भाषा : कुलपति

हिंदी भारतीय संस्कृति की प्रतिनिधित्व करने वाली है भाषा : कुलपति

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प्रतिनिधि, मधेपुरा भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय शैक्षणिक परिसर स्थित विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग व आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में शनिवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का विषय “विकसित भारत की संकल्पना व हिंदी ” था. संगोष्ठी कार्यक्रम में बीएनएमयू कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा, कुलसचिव प्रो बिपिन कुमार राय, रसायनशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो अशोक कुमार यादव, रमेश झा महिला महाविद्यालय सहरसा की पूर्व प्राचार्या प्रो रेणु सिंह, मनाविकी संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो राजीव कुमार मल्लिक, आइक्यूएसी निदेशक प्रो नरेश कुमार व विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ बिनोद मोहन जायसवाल मंच पर उपस्थित थे. हिंदी राष्ट्रीय एकता व देश को जोड़ने वाली भाषा संगोष्ठी कार्यक्रम के उदघाटनकर्ता सह मुख्य अतिथि कुलपति ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की. जिसके बाद हिंदी विभाग की छात्राओं ने कुलगीत गाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया. कुलपति ने हिंदी दिवस को राष्ट्रीय पर्व बताते हुए हिंदी को राष्ट्रीय एकता व देश को जोड़ने वाली भाषा कहा. उन्होंने सभी शिक्षकों को हिंदी में पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया और कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति की प्रतिनिधित्व करने वाली भाषा है. हिंदी दिवस पूरे देशवासियों के लिए महत्वपूर्ण दिन विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ विनोद मोहन जायसवाल ने हिंदी दिवस को पूरे देशवासियों के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया. विषय प्रवर्तन करते हुए डाॅ प्रफुल्ल कुमार ने हिंदी भाषा व भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित भारत की संपूर्ण संकल्पना के लिए आवश्यक बताया. कुलसचिव ने हिंदी के संवैधानिक प्रावधानों की चर्चा की और राजभाषा के विकास में संघ के दायित्वों का भी जिक्र किया. बीएनएमयू के पूर्व कुलानुशासक डाॅ विश्वनाथ बिबेका ने हिंदी की वर्तमान स्थिति व न्यायालय की भाषा के रूप में हिंदी की पुरजोर वकालत की. हिंदी में विश्वभाषा बनने की तमाम संभावना मौजूद आइक्यूएसी निदेशक प्रो नरेश कुमार ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए हिंदी में स्तरीय पुस्तक लेखन की जरूरत पर बल दिया. मानविकी संकाय के संकायध्यक्ष प्रो राजीव कुमार मल्लिक ने हिंदी व अंग्रेजी की तुलना करते हुए हिंदी भाषा में पठनीयता की कमी का जिक्र किया व भाषा के विविध आयामों की चर्चा की. रमेश झा महिला महाविद्यालय सहरसा की पूर्व प्राचार्या प्रो रेणु सिंह ने राजभाषा, मातृभाषा व जनभाषा हिंदी के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि हिंदी में विश्वभाषा बनने की तमाम संभावनाएं मौजूद हैं. बशर्ते हम सबको हिंदी को आत्मसात करने की जरूरत है. प्रतियोगिता के विजेता को किया गया पुरस्कृत कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो अशोक कुमार ने विकसित भारत के विविध पहलुओं जैसे आर्थिक, सामाजिक व वैज्ञानिक विकास की अवधारण व विस्तार पर प्रकाश डाला और बताया कि भाषा की प्रासंगिकता उसकी सहजता कर सरलता में है, जो हिंदी में मौजूद है. मौके पर निबंध लेखन व काव्यपाठ प्रतियोगिता के विजेता प्रियंका, आदेश, श्वेता, प्रतिभा, ज्योति व प्रियम को पुरस्कृत किया गया. डाॅ रश्मि कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया. मंच संचालन डाॅ पूजा गुप्ता ने किया. मौके पर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो सीपी सिंह, प्रो डीएन साह, डाॅ अमरेंद्र कुमार, डाॅ ललन प्रसाद अद्री, अनिल कुमार, अंशु कुमारी, विभीषण कुमार, नरेश कुमार, माधव कुमार, सुमेध आनंद, प्रवीण कुमार, आदेश प्रताप, प्रियंका, जूही, पूजा आदि मौजूद थे.

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