कोर्ट का चला हथौड़ा प्रशासन दे मुआवजा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 May 2017 4:22 AM (IST)
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कैदी वाहन की ठोकर से हुई थी शैलेंद्र साह की मौत, नशे में धुत वाहन चालक ने 18 सितंबर 2010 को शहर में कई जगह की थी दुर्घटना एडीजे प्रथम की न्यायालय ने दिया फैसला, डीएम करें कैदी वाहन की ठोकर से मृतक के परिजनों को 13.5 लाख का भुगतान मधेपुरा : 18 सितंबर 2010 […]
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कैदी वाहन की ठोकर से हुई थी शैलेंद्र साह की मौत, नशे में धुत वाहन चालक ने 18 सितंबर 2010 को शहर में कई जगह की थी दुर्घटना
एडीजे प्रथम की न्यायालय ने दिया फैसला, डीएम करें कैदी वाहन की ठोकर से मृतक के परिजनों को 13.5 लाख का भुगतान
मधेपुरा : 18 सितंबर 2010 को नशे में धुत कैदी वैन चालक कैदी वैन से पूरे शहर में उत्पात मचाता है.
कई जगह रिक्शा व लोगों को ठोकर मारने के बाद एक पोल से टकराकर कैदी वैन जब रुकती है तो चालक की भी जमकर पिटाई होती है व उसपर मुकदमा दर्ज किया जाता है. वहीं इसी वैन की ठोकर से जख्मी हुए शैलेंद्र साह की मौत हो जाती है. उनके परिजनों द्वारा इस मामले में वरीय अधिवक्ता श्यामानंद गिरि के माध्यम से एडीजे प्रथम सह मोटर वाहन दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल के समक्ष मुआवजा के लिए वाद दायर किया जाता है.
29 जनवरी 2011 को दायर इस मुकदमे में तीन अप्रैल 2017 को एडीजे प्रथम मिथिलेश कुमार द्विवेदी ने 13 लाख 43 हजार रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया. एडीजे प्रथम ने वाद दाखिल होने की तिथि से अब तक नौ प्रतिशत साधारण ब्याज की दर से इस राशि को भुगतान करने का फैसला सुनाया है. 90 दिन के अंदर मुआवजा भुगतान नहीं करने पर ब्याज की दर 12 प्रतिशत होगी.
क्या है मामला .एडीजे प्रथम सह मोटर वाहन दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल की अदालत में शैलेंद्र प्रसाद साह की विधवा पूनम देवी समेत तीन पुत्र व एक पुत्री ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस अधीक्षक, जिला पदाधिकारी व कैदी वाहन चालक योगेंद्र सिंह के विरुद्ध मुआवजा का वाद दायर कर 15 लाख 14 हजार का दावा किया था. मुकदमे की सुनवाई छह साल तक चली. शैलेंद्र प्रसाद साह की मृत्यु बिहार सरकार के नाम से रजिस्टर्ड वाहन संख्या बीआर 43 – 5324 से ठोकर लगने की वजह से हुई. वाहन जिलाधिकारी व एसपी के नियंत्रण में रहने की वजह से जुर्माना भुगतान के लिए मुख्य सचिव, डीएम व एसपी उत्तरदायी हैं. इस मामले के पैरवीकार वरीय अधिवक्ता श्यामानंद गिरि ने कहा कि डीएम को ब्याज समेत आज के तारीख में लगभग 21 लाख रुपये का भुगतान करना है.
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