उदाकिशुनगंज का इतिहास महेशा रहा है गौरवशाली

Published at :22 May 2017 5:21 AM (IST)
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उदाकिशुनगंज का इतिहास महेशा रहा है गौरवशाली

उदाकिशुनगंज अनुमंडल का 34वां स्थापना दिवस विशेष उदाकिशुनगंज : अपने मजबूत व गौरवशाली अतीत के स्तंभ पर खड़े मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल का रविवार को 34 वां स्थापना दिवस मनाया गया. 260 वर्ग मील में फैले इस उदाकिशुनगंज को 21 मई 1983 के दिन अनुमंडल का दर्जा प्राप्त हुआ था. छह प्रखंडों का प्रतिनिधित्व […]

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उदाकिशुनगंज अनुमंडल का 34वां स्थापना दिवस विशेष

उदाकिशुनगंज : अपने मजबूत व गौरवशाली अतीत के स्तंभ पर खड़े मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल का रविवार को 34 वां स्थापना दिवस मनाया गया. 260 वर्ग मील में फैले इस उदाकिशुनगंज को 21 मई 1983 के दिन अनुमंडल का दर्जा प्राप्त हुआ था. छह प्रखंडों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस अनुमंडल अंतर्गत कुल 76 ग्राम पंचायतें हैं. उदय सिंह और किशुन सिंह दो भाई थे. इन्हीं दोनों के नाम पर उदाकिशुनगंज का नाम रखा गया था.
16 वीं सदी के छाया परगना के अधीन यह क्षेत्र घनघोर जंगल, कोसी नदी तथा उसकी छाड़न नदियों से आच्छादित हुआ करती थी. किवदंतियों के अनुसार छोटा नागपुर से मात्र एक परिवार चलकर इस दुर्गम स्थान पर पहुंचा और यहीं का होकर रह गया. कहते हैं उसी परिवार के एक हरिश नामक व्यक्ति ने घूम-घूम कर विभिन्न जातियों तथा संप्रदायों से जुड़े परिवारों को यहां एकत्रित कर बसाना शुरू किया और धीरे-धीरे यहां की आबादी ने नगर का रूप ले लिया.
सन 1703 में उदय सिंह नामक एक क्षत्रिय चंदेल राजपूत ने इस क्षेत्र पर अपना अधिकार जमाया और यहां के वासिंदो के लिये कुआं, सराय, आवागमन तथा जान – माल की रक्षा आदि जैसी सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाया. तत्पश्चात उदय सिंह के उत्तराधिकारियों ने शाह शुजा से अपने अधीनस्थ क्षेत्र के राजस्व का वैधानिक फरमान प्राप्त कर शासन का सूत्रधार बना. उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र का अपनी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहचान के अलावे आजादी में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. यहां के बाजा साह स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में 20 अगस्त 1942 को शहीद हुए थे. इनको पूरे कोसी क्षेत्र में पहला शहीद होने का गौरव प्राप्त है.
वहीं अनुमंडल अंतर्गत सरसंडी ग्राम में बादशाह अकबर द्वारा निर्मित एक विशाल मस्जिद जो मिट्टी में दबी हुई है. अकबर कालीन गंधबरिया राजा बैरीसाल का किला, चंद्रगुप्त द्वितीय काल में स्थापित नयानगर का मां भगवती मंदिर, चंदेल शासकों द्वारा शाह आलमनगर में निर्मित जलाशय और दुर्ग, शाह आलमनगर के खुरहान में स्थित मां डाकिनी का अतिप्राचीन मंदिर, शाह आलमनगर में राजा का ड्योढ़ी, चौसा में स्थित मुगल बादशाह रंगीला के समकालीन चरवाहाधाम पचरासी, चौसा के चंदा में स्थित अलीजान शाह का मकबरा, ग्वालपाड़ा के नौहर ग्राम में मिले अवशेष आदि अनगिनत साक्ष्य उदाकिशुनगंज अनुमंडल के समृद्ध इतिहास के प्रमाण आज भी मौजूद हैं.
कैसे मिला अनुमंडल
का दर्जा
अंग्रेजी हुकूमत के समय (सन्-1883) यहां मुंसिफ कोर्ट हुआ करता था. 80 वर्ष बाद 1962 में आयी भयंकर बाढ़ के कारण यहां का मुंसिफ कोर्ट सुपौल में स्थानांतरित कर दिया गया. 1970 में शिक्षाविद कुलानंद साह के नेतृत्व में उदाकिशुनगंज को अनुमंडल का दर्जा दिये जाने की मांग उठी.
करीब दो दशक बाद उदाकिशुनगंज के तत्कालीन विधायक सिंहेश्वर मेहता, पुर्व मंत्री वीरेंनदर सिंह एवं पुर्व मंत्री विद्याकर कवि एमएलसी वागेशवरी प्रसाद सिंह के सकारात्मक प्रयास के बदौलत ही इसे अनुमंडल का दर्जा प्राप्त हुआ. ज्ञात हो कि 21 मई 1983 ई में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा जगन्नाथ मिश्रा के करकमलों द्वारा एचएस उच्च विद्यालय के मैदान में अनुमंडल का उद्घाटन किया गया. उस समय इस अनुमंडल का कार्यालय एचएस उच्च विद्यालय के छात्रावास में ही बनाया गया था. यह करीब 1993 तक चला. इसके बाद से अबतक यह अनुमंडल कार्यालय सरकार द्वारा अधिकृत जमीन पर बने सामुदायिक भवन में ही चल रहा है. हालांकि पास ही स्थायी व भव्य अनुमंडल कार्यालय भवन बन कर तैयार हो चुका है जो अपने उद्घाटन की बाट जोह रहा है.
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