मटियामेट हो रही जिले की विरासत

Published at :24 Apr 2017 5:47 AM (IST)
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मटियामेट हो रही जिले की विरासत

उदासीनता. खिड़की तोड़ कर की जा रही बेशकीमती पुस्तकों की चोरी साठ के दशक में बना पुस्तकालय के बरामदे पर शौच होता है. यहां कभी साहित्यकारों व विद्वानों का जमावड़ा लगा रहता था. प्रशासन की लापरवाही से आज यह खंडहर बनता जा रहा है. परिसर में आस-पास के लोग गंदा पानी बहाते हैं. मधेपुरा : […]

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उदासीनता. खिड़की तोड़ कर की जा रही बेशकीमती पुस्तकों की चोरी

साठ के दशक में बना पुस्तकालय के बरामदे पर शौच होता है. यहां कभी साहित्यकारों व विद्वानों का जमावड़ा लगा रहता था. प्रशासन की लापरवाही से आज यह खंडहर बनता जा रहा है. परिसर में आस-पास के लोग गंदा पानी बहाते हैं.
मधेपुरा : विरासतों को सहेजने में किस कदर नाकामी है इसका जीता जागता उदाहरण वार्ड नंबर 19 का समदर्शी पुस्तकालय भवन है. निजी पुस्तकालय से अनुमंडल पुस्तकालय तक का सफर बगैर किसी सरकारी सहयोग के शानदार तरीके से करने वाला यह पुस्तकालय भवन अब खंडहर में तब्दील हो गया है. बेशकीमती पुस्तकें चोरी हो रही है. परिसर में आस पास के लोग गंदा पानी बहाते हैं. बरामद पर शौच किया जा रहा है. इसके अलावा हर रोज चोर यहां से कुछ न कुछ चोरी कर रहे है,
पर इसकी सुधी लेने वाला कोई नहीं है. रविवार को जब मुहल्ले वासियों ने गली में दो रिक्शा तथा कई बोरी में भरा समान देखा तो शक के आधार पर बोरी पलट कर देखने के क्रम में किताबें पायी गयी. चोरी भी तब तक समझ चुके थे वे पकड़े जा सकते हैं और तुरंत नौ दो ग्यारह हो गये. पुस्तकालय अध्यक्ष को घटना की सूचना देने पर उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2016 को पत्र देकर उन्हें हटा दिया गया है. उनका मामला कोर्ट में है. तत्काल डीएम के आदेश से दो शिक्षक प्रतिनियुक्त हैं.
सर्राफ परिवार ने दी थी पुस्तकालय के लिए जमीन व भवन. शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी लखी प्रसाद सर्राफ द्वारा 60 के दशक में पुस्तकालय के लिए जमीन एवं भवन दान में दिया गया. यहां समदर्शी पुस्तकालय के नाम से पुस्तकालय का संचालन होने लगा. इस प्राइवेट पुस्तकालय की देख रेख के लिए रामजी महाराज को नियुक्त किया गया. 2014 में रामजी महाराज सेवा निवृत हो गये.
पुस्तक प्रेमी आज भी याद करते हैं स्वर्णिम दौर . एक जमाने में जब सूचना क्रांति या इंटरनेट इतना आम नहीं हुआ था लोगों के लिए पुस्तकालय ज्ञान तथा सूचना का मुख्य केंद्र था. बीते दौर को याद करते हुए पार्वती विज्ञान महाविद्यालय के प्राध्यापक डा हरेकृष्ण यादव कहते हैं इतिहास संबंधी शोध परक जर्नल हो या विभिन्न लेखकों की किताब, इस पुस्तकालय में सबकुछ उपलब्ध था. वहीं सेवा निवृत शिक्षक रघुनाथ प्रसाद यादव कहते हैं कि उन्होंने पुस्तकालय का स्वर्णिम दौर देखा है.
कबाड़ के भाव में बिकने जा रही थी पुस्तकें. गली में दो रिक्शा लेकर दो लड़की आती है वहां कुछ लड़के छह से सात बोरी लेकर खड़े है, अचानक इन पर बबलु यादव की नजर पड़ती है. वे जब पूछताछ करते है तो उन्हें बताया जाता है कि यह कबाड़ है. उन्होंने जमा किया है और अब ले जा रहे है. अल्पशिक्षित बबलु माजरा ठीक से समझ नहीं पाता
और आसपास के लोगों को आवाज देता है इस क्रम में केशव कन्या के शिक्षक यादव विक्रम उर्फ कुंदन जी, राजेश श्रीवास्तव, जीतेंद्र जी, समेत कई लोग पहुंचते है. बोरी खोल कर देखने पर बेश कीमती और दुर्लभ पुस्तकें जिन पर पुस्तकालय की मुहर थी पाये जाने पर जैसे ही पुछताछ शुरू करते हैं सभी चोर भाग खड़े होते है. केंद्रीय पुस्तकालय के पुस्तकालय अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद यादव को मोबाइल द्वारा मामले की जानकारी दी गयी. उन्होंने कहा कि उन्हें हटा दिया गया है. डीएम के आदेश से दो शिक्षक प्रतिनियुक्त हैं.
कहते हैं डीइओ
जिला शिक्षाधिकारी शिवशंकर राय से जानकारी ली गयी तो उन्होंने कहा समाहरणालय के सामने बने केंद्रीय पुस्तकालय में शिक्षक प्रतिनियुक्त हैं. हालांकि उन दोनों शिक्षकों को तात्कालीन पुस्तकालय अध्यक्ष द्वारा प्रभार नहीं दिया गया है. वार्ड नंबर 19 के पुराने भवन एवं उसमें रखे पुस्तक या उपस्कर की जानकारी प्राप्त कर रहे है. जल्द ही उस पुस्तकालय को भी रंगरोगन कर चालू किया जायेगा.
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