क्या जायज है 88 लाख खर्च

Published at :26 Dec 2016 5:22 AM (IST)
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क्या जायज है 88 लाख खर्च

गड़बड़झाला . मेंटेनेंस के नाम पर हो रहे खर्च की पार्षदों ने जांच की मांग शहर में एलइडी लाइट लग जाने के बाद महज डेढ़ केवीए लोड हो जाने के कारण बिजली बिल की राशि पांच हजार हो जायेगी. ऐसे में नगर परिषद से 88 लाख की राशि का खर्च हाइमास्ट लाइट के रखरखाव व […]

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गड़बड़झाला . मेंटेनेंस के नाम पर हो रहे खर्च की पार्षदों ने जांच की मांग

शहर में एलइडी लाइट लग जाने के बाद महज डेढ़ केवीए लोड हो जाने के कारण बिजली बिल की राशि पांच हजार हो जायेगी. ऐसे में नगर परिषद से 88 लाख की राशि का खर्च हाइमास्ट लाइट के रखरखाव व बिजली बिल के मद में सालाना हो रहा है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह खर्च कहां तक जायज है?
केंद्र व राज्य सरकार बिजली बचाने के लिए दे रही है एलइडी पर जोर
पीली रोशनी के पीछे के काले सच को जांच कर उजागर करें कार्यपालक पदाधिकारी
मधेपुरा : बिहार सरकार के अधीन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराती है. जिस दर से बिजली खरीदी जाती है, उससे कम दर में बिजली उपलब्ध करायी जाती है, ताकि हर आम व खास इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकें. केंद्र सरकार व बिहार सरकार द्वारा बिजली संरक्षण के लिए एलइडी बल्ब समेत कई उपाय ग्राहकों को लगातार बताये जाते हैं.
यहां तक कि हर विद्युत कार्यालय परिसर में ग्राहकों के लिए एलइडी बल्ब सरकार द्वारा नियंत्रित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है. ऐसे में नगर परिषद मधेपुरा में चल रहा यह मुद्दा की हाइमास्ट लाइट में एलइडी लगाया जाय या नहीं बेमानी साबित हो रहा है. एक हाइमास्ट लाइट पर पांच किलोवाट का लोड होता है. इसका मासिक बिल 19 हजार सात सौ 16 रुपये जेनरेट होता है. इस प्रकार लगभग 80 लाख रुपये सालाना नगर परिषद केवल हाइमास्ट लाइट का बिजली बिल भरता है.
इसके अलावा आठ लाख 16 हजार रुपये इन हाइमास्ट लाइट के रखरखाव के लिए संबंधित एजेंसी को दी जाती है. महज एक नगर परिषद से 88 लाख की राशि का खर्च हाइमास्ट लाइट के रखरखाव व बिजली बिल के मद में सालाना हो रहा है. एलइडी लग जाने के बाद महज डेढ़ केवीए लोड हो जाने के कारण बिजली बिल की राशि लगभग पांच हजार हो जायेगी. वहीं अगले दो साल तक वारंटी पॉलिसी के तहत मेंटिनेंस व अन्य जिम्मेवारी निविदा में सफल
कंपनी की होगी. इसके लिए कोई अतिरिक्त राशि खर्च नहीं करनी होगी.
पीली रोशनी का काला सच
नगर परिषद क्षेत्र में 34 हाइमास्ट लैंप है. इनके रखरखाव के लिए प्रतिमाह 68 हजार रुपये नगर परिषद व्यय करता है. इसके बावजूद आधे के करीब हाइमास्ट लैंप खराब है या आंशिक रूप से कार्य कर रहे हैं. सलाना सात लाख 68 हजार चुकाने के बावजूद हाइमास्ट लैंपों की यह दशा दर्शाती है कि उनका मेंटिनेंस बेहद घटिया तरीके से हो रहा है.
मेंटिनेंस के नाम पर हर माह राशि का भुगतान होता है. इसके अलावा मेंटिनेंस में लगी फर्म द्वारा कई हाइमास्ट लाइट में हैलोजन की जगह दो सौ या पांच सौ वाट का बल्ब लगा दिया गया है. इसकी अगर विस्तृत जांच हो कि मेंटिनेंस के नाम पर किस प्रकार कार्य हो रहा है इसका एक बड़ा मामला सामने आ जायेगा. सशक्त स्थायी समिति सदस्य ध्यानी यादव, वार्ड पार्षद मुकेश कुमार, मुकेश कुमार मुन्ना ने कहा अविलंब शहर के सभी हाइमास्ट लाइट की जांच करवाकर गड़बड़ी करने वाले फर्म को काली सूची में डालकर एफआइआर दर्ज कराया जाय. जनता के पैसे का दुरुपयोग बश्दास्त नहीं की जायेगी. अविलंब कार्रवाई नहीं होती है तो इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी के विरुद्ध भी आंदोलन किया जायेगा.
नगर परिषद कार्यालय, जहां आजकल एलइडी लगाये जाने को लेकर गहमागहमी है.
एक हाइमास्ट लाइट का लोड पांच केवीए होने के कारण प्रतिमाह 19 हजार सात सौ 16 रुपये बिल जेनरेट होता है. उर्जा संरक्षण विद्युत विभाग एवं बिहार सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है. विद्युत विभाग बिजली खरीदती है लिहाजा बिजली खरीदने के लिए भारी भरकम राशि भुगतान करना होता है. उर्जा संरक्षण से विद्युत खपत कम होगी. इसका लाभ सबों को मिलेगा. सभी ग्राहकों से अपील है वे अपने घर में शत प्रतिशत एलइडी बल्ब इस्तेमाल करें. बकाया विद्युत बिल अविलंब जमा करायें अन्यथा विभाग युद्ध स्तर पर सभी प्रखंड क्षेत्रों में विद्युत विच्छेदन एवं अन्य सख्त कार्रवाई कर रही है.
– अमित कुमार, कार्यपालक अभियंता, विद्युत विभाग, मधेपुरा.
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