सरकार की नयी पॉलिसी से ईंट उद्योग पर पड़ा असर

Updated at : 27 Dec 2017 3:50 AM (IST)
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सरकार की नयी पॉलिसी से ईंट उद्योग पर पड़ा असर

मधेपुरा : कोसी में ईंट निर्माण उद्योग के सामने काफी चुनौतियां है. ईंट निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री की जहां कमी है. वहीं सड़कों की जर्जरता का असर कोयला की ढुलाई पर पड़ रहा है. इसके बावजूद ईंट निर्माण में लगे व्यापारी मेहनत कर लोगों के घर बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाले ईंट का […]

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मधेपुरा : कोसी में ईंट निर्माण उद्योग के सामने काफी चुनौतियां है. ईंट निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री की जहां कमी है. वहीं सड़कों की जर्जरता का असर कोयला की ढुलाई पर पड़ रहा है. इसके बावजूद ईंट निर्माण में लगे व्यापारी मेहनत कर लोगों के घर बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाले ईंट का निर्माण में जुटे हैं. सरकार के कई बेतुके नियम इस उद्योग के लिए खतरा बन रहे है. ऐसे में पूरे कोसी क्षेत्र के ईंट व्यवसायियों को एकजुट होकर कानूनी लड़ाई के लिए तत्पर होना होगा. ये बातें पूर्व मुख्य पार्षद सह कोसी ईंट निर्माता संघ के अध्यक्ष डा विशाल कुमार बबलू ने मंगलवार को प्रेसवार्ता के दौरान कही.

उन्होंने कहा कि 30 दिसंबर को सुपौल स्टेशन रोड स्थित आरके पैलेस में कोसी क्षेत्र के ईंट निर्माताओं की आकस्मिक बैठक बुलायी गयी है. इसमें तीनों जिले से ईंट निर्माता उपस्थित होकर संघर्ष की रूप रेखा तय करेंगे. सरकार की नयी-नयी पॉलिसी से सर्वाधिक ईंट उद्योग पर ही असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि नयी पॉलिसी बनाते वक्त ईंट निर्माण में जुड़े व्यापारियों से भी राय लेने की आवश्यकता है. ताकि समावेशी तरीके से नीति का निर्माण हो सके.
हो जीएसटी कंपाउडिंग के तहत ईंट उद्योग : कोसी ईंट निर्माता संघ के सचिव प्रभाष चंद्र गुप्ता ने कहा कि ईंट उद्योग कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लागत काफी बढ़़ गयी है. इसके अलावा चिमनी को भी नये डिजाइन के अनुसार बनाना पड़ रहा है. वहीं ईंट उद्योग में प्रयुक्त होने वाली सामग्री व मजदूरी भी बढ़ गयी है. लिहाजा सबों के सामने अपने व्यवसाय को बचाने की चुनौती है. दूसरी ओर ईंट उद्योग को जीएसटी के कंपाउंडिंग से बाहर रखा गया है, जबकि एक वर्ष में महज 25 लाख ईंट का निर्माण एक भट्ठा पर होता है. उसमें से 20 प्रतिशत ईंट नष्ट हो जाते है. बचे हुए ईंट की कीमत जीएसटी के कंपाउंडिंग के तहत आने वाली राशि से कम है.
ऐसी स्थिति में इस उद्योग को भी उदारता पूर्वक कंपाउंडिंग में शामिल करना चाहिए. वहीं इ-चलान के रूप में एक नयी परेशानी जन्म ले रही है. गांव-वीराने में होने वाले ईंट भट्ठा पर कंप्यूटर से लेकर प्रिंटर व तमाम आधुनिक सुविधाएं रखना तथा इस हिसाब से ई – चलान उपलब्ध कराना नई परेशानी होगी. ऐसे में उद्योग को बचाने के लिए रास्ता तलाशने की आवश्यकता है. वहीं इसी बैठक में ईंट की कीमत तय करने से लेकर अन्य बिंदुओं पर राय शुमारी की गयी. मौके पर देव कृष्ण कुमार, आलोक कुमार, रमेश प्रसाद यादव, मनीष कुमार, रणवीर यादव, विश्वप्रकाश भारती, शुक्ला जी, संतोष कुमार सिंह, महेश कुमार, मनोज कुमार आदि उपस्थित थे.
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