नहीं है किराये का पैसा, ललिता कैसे जायेगी दवा लाने अस्पताल
Updated at : 14 Dec 2017 4:54 AM (IST)
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पत्नी की देखभाल के कारण पति नहीं कर पा रहा मजदूरी ललिता की दवाएं हुई खत्म, किराये के अभाव में पति नहीं जा पा रहा है सदर अस्पताल बच्चे नहीं जा रहे स्कूल जीतापुर : सदर प्रखंड अंतर्गत महेशुआ पंचायत के हनुमान नगर चौड़ा गांव के वार्ड नंबर 20 में सदर अस्पताल मधेपुरा से घर […]
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पत्नी की देखभाल के कारण पति नहीं कर पा रहा मजदूरी
ललिता की दवाएं हुई खत्म, किराये के अभाव में पति नहीं जा पा रहा है सदर अस्पताल
बच्चे नहीं जा रहे स्कूल
जीतापुर : सदर प्रखंड अंतर्गत महेशुआ पंचायत के हनुमान नगर चौड़ा गांव के वार्ड नंबर 20 में सदर अस्पताल मधेपुरा से घर लौटी ललिता के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, लेकिन उनको जीवन यापन की चिंता सता रही है. गत बुधवार को थोड़ी सी दवा देकर अस्पताल प्रबंधक ने उसे घर भेज दिया. हालांकि अभी पूर्ण रूप से वह ठीक नहीं हो पायी है. ललिता ने बताया कि अभी भी दर्द उठता रहता है. उसकी दवाएं खत्म हो चुकी है. पति को दवा लाने सदर अस्पताल भेजे भी तो कैसे. किराये के लिए पैसे नहीं है. ललिता ने बताया कि न जनप्रतिनिधि, न समाजसेवी व न प्रशासन की ओर से किसी तरह की सहायता मिली है. उधार लेकर किसी तरह खाना चल रहा है.
आखिर कब तक ऐसा हो पायेगा. बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, पति घर में न रहे तो खाना-पीना और उसकी देखभाल बंद हो जाये. अब हमलोग भगवान भरोसे हैं. जब वे लोग पटना के नर्सिंग होम में बंधक बने हुए थे और उनका लड़का भीख मांगकर रुपये भेज रहा था. प्रभात खबर ने खबर को प्रमुखता से छापा और उस खबर के बाद स्थानीय सांसद ने उसे नर्सिंग होम से छुड़वाकर घर भेज दिया, नहीं तो आज हम नर्सिंग होम में ही बंधक बने रहते. आप लोगों ने मेरे जीवन में जीवन जीने की उम्मीद पैदा की, नहीं तो मेरा बेटा भी भीख मांग मांग कर थक जाता और मैं छूट नहीं पाती.
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