गोरखधंधा कर रंटू बन गया डाॅॅ जॉन
Updated at : 26 Oct 2017 6:03 AM (IST)
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अपराध. छोटे मोटे सेटर के रूप में हाथ आजमाता था रंटू उर्फ अमोद मधेपुरा : कम समय में करोड़पति बनने का सपना संजोने वाले रंटू को बचपन में ही पैसे की बुरी लत लग गयी थी. गांव से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी कर रंटू बाहरवीं क्लास में अमोद के नाम से जाने जाना लगा. पहले तो […]
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अपराध. छोटे मोटे सेटर के रूप में हाथ आजमाता था रंटू उर्फ अमोद
मधेपुरा : कम समय में करोड़पति बनने का सपना संजोने वाले रंटू को बचपन में ही पैसे की बुरी लत लग गयी थी. गांव से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी कर रंटू बाहरवीं क्लास में अमोद के नाम से जाने जाना लगा. पहले तो अमोद छोटे मोटे सेटर के रूप में अपनी पहचान बनायी इसके बाद अमोद जब लोगों के सामने आया तो वह नीट, इंजीनियरिंग व अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के बड़े सेटर के नाम से विख्यात डाॅॅ जॉन मेहता उर्फ राजीव रंजन बन चुका था. डाॅॅ जॉन को बचपन में लगी पैसे की लत ही उसके लिए गले का फांस बन गया.
हालांकि इस बीच डाॅ जॉन ने बचपन का ख्वाब पूरा करते हुए करोड़ों की अकूत संपति अर्जित कर ली. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डाॅ जॉन द्वारा फर्जीवाड़े की कमाई से अर्जित संपित में पटना के मोसलमपुर घाट के समीप करीब साढ़े तीन करोड़ की फ्लैट के अलावे बिहारीगंज मुरलीगंज मुख्य सड़क के बगल में हाल फिलहाल खरीदी गयी लाखों की जमीन शामिल है. मधेपुरा जिले के बिहारीगंज प्रखंड स्थित तलसिया वार्ड नंबर 03 मेहता टोला निवासी सेवानिवृत शिक्षक अनंदी मेहता के द्वितीय पुत्र रंटू उर्फ अमोद उर्फ राजीव रंजन उर्फ डाॅ जॉन मेहता को
मेडिकल पीजी परीक्षा (नीट) में हुए फर्जीवाड़ा करने एवं स्कॉलर बनने के साथ ही साफ्टवेयर को हैक करने के आरोप में दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने मंगलवार को पटना मेडिकल कॉलेज (पीएमसीएच) से गिरफ्तार कर लिया है. उस पर दिसंबर 2016 में मेडिकल पीजी के लिए
आयोजित नीट में 100 से अधिक डॉक्टरों पर फर्जीवाड़ा कर पास कराने का शक है. बताया जा रहा है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) द्वारा नीट का आयोजन हुआ था. इसमें धांधली की शिकायत पुलिस और कोर्ट तक पहुंची थी. इसके बाद जांच-पड़ताल की गति तेज हुई. इसमें करोड़ों की सौदेबाजी हुई थी.
सेटिंग गेटिंग से बिहार का टॉपर बन गया डाॅ जॉन. प्रभात खबर के पड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ कि अमोद उर्फ डाॅ जॉन ने अपने छोटे भाई सुबोध का एडमिशन दिल्ली एम्स में कराया था. इसके अलावे अन्य डॉक्टरों का भी पीजी में चयन करवाने का आरोप लगा है. चूंकि अमोद का छोटा भाई सुबोध दिल्ली एम्स में सेकेंड इयर का छात्र रह चुका है.
हालांकि सेकेंड इयर में पासआउट नहीं होने के कारण सुबोध को बाहर कर दिया गया. अब सुबोध दिल्ली में भारतीय डाॅ विभाग में कार्यरत है. डाॅ जान मेहता पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में गड़बड़ी करने का आरोप है. वह पिछले साल हुए नीट में बिहार कोटे का थर्ड टॉपर भी रह चुका है. उसकी ऑल इंडिया रैंकिंग 800 के आसपास थी. इसी वर्ष नीट का प्रश्नपत्र वायरल हुआ था, जिसकी छानबीन में दिल्ली पुलिस जुटी थी. इस मामले में उस पर स्कॉलर बनने के साथ ही सीबीएसई की ऑनलाइन परीक्षा के सॉफ्टवेयर को हैक करने का आरोप है.
पीएमसीएच से ही इसने एमबीबीएस किया था. वह फिलहाल रेडियोलॉजी विभाग में पीजी कर रहा था. इसने 2008 में पीएमसीएच में एमबीबीएस में नामांकन लिया था और 2014 में पासआउट हुआ. इस दौरान 2013 में प्रतियोगिता परीक्षाओं में सेटिंग में इसका नाम सामने आया था. गौरतलब है कि परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर अच्छी रैंकिंग मिलने के चलते उसे पीएमसीएच पीजी में रेडियोलॉजी विभाग मिला था. उसने नीट में ऑल इंडिया रैंकिंग 386 हासिल की थी. बिहार में ओबीसी कोटे के तहत उसकी तीसरी रैंक आई थी. लेकिन उससे पहले के दो लोगों ने बिहार से बाहर जाकर दाखिला लिया. इस तरह से वह बिहार से पीजी में दाखिला पाने के लिए नंबर एक बन गया. डाॅ जॉन ने नोएडाॅ स्थित केन्द्र पर बैठकर पीजी की परीक्षा दी थी, इसके बाद उसका चयन हुआ था.
साजिश के तहत राजीव को फंसाया गया. इस संदर्भ में डाॅ जान के पिता सेवानिवृत शिक्षक अनंदी मेहता ने कहा कि उनका द्वितीय पुत्र अमोद उर्फ राजीव रंजन पटना पीएमसीएच में एमबीबीएस पास करने के बाद एमडी की पढ़ाई कर रहा था. किसी साजिश के तहत राजीव का फंसाया गया है. तीन चार बीघा पैतृक संपति के अलावे पेंशन के सहारे वे अपना जीवन यापन करते है.
फर्जीवारा में पहले भी गिरफ्तार हो चुका है जॉन
प्रभात खबर के पड़ताल में पता चला कि डाॅ जान ने पांच-छह अन्य डॉक्टरों को भी इस पीजी परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर चयनित करवा चुका है. इस काम के लिए उसने इन डॉक्टरों से मोटी रकम वसूली थी. सूत्रों ने बताया कि उसे कुछ वर्ष पहले रोहतक सीआईडी ने एआईपीएमटी परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े में भी गिरफ्तार किया गया था. जबकि एक बार पटना पुलिस भी उसे गिरफ्तार कर बेउर जेल भेज चुकी है. उस समय उसका नाम अमोद से बदल कर नाम राजीव रंजन हो चुका था.
डॉ जॉन वर्ष 2009 में उसे पीएमसीएच में एमबीबीएस में नामांकन मिला था. वर्ष 2013 में उसने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 2017 की पीजी परीक्षा में वह अपने बैच का टॉपर रहा. एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही वह सॉल्वर गैंग से सांठगांठ करने लगा. मिल रही जानकारी के अनुसार पिछले दो साल से वह नीट की ऑनलाइन परीक्षा में सॉफ्टवेयर हैक कर सेटिंग कर रहा था. इसके लिए वह एक छात्र से 50 लाख से एक करोड़ तक में सौदा करता था. डॉ जॉन के खिलाफ दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश और हरियाणा के रोहतक में भी मेडिकल में फर्जीवाड़ा का केस दर्ज है.
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