मधेपुरा में सड़कों पर गायों का कब्जा, हर दिन बढ़ रहा हादसों का खतरा

कचरा विचरण करते पशु | Prabhat Khabar Network
Madhepura News: मधेपुरा शहर की सड़कों पर आवारा गायों के झुंडों ने आतंक मचा रखा है। ये न सिर्फ यातायात को बाधित कर रही हैं, बल्कि हर दिन दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रही हैं। स्थानीय निवासी इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
मधेपुरा से रिपोर्ट
Madhepura News: सुबह बाजार जाना हो, बच्चों को स्कूल छोड़ना हो या रात में घर लौटना हो. मधेपुरा शहर की सड़कों पर इन दिनों सबसे बड़ा डर ट्रैफिक नहीं, बल्कि आवारा गायें बन गई हैं. शहर के कई प्रमुख रास्तों पर गायों के झुंड सड़क के बीचों-बीच बैठे नजर आते हैं. इससे न सिर्फ जाम की स्थिति बन रही है, बल्कि हर दिन दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या अब सामान्य नहीं रही. प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं. नतीजा यह है कि राहगीर, दुकानदार और वाहन चालक रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर हैं.
शहर के प्रमुख चौक बन गए आवारा पशुओं का ठिकाना
मधेपुरा के सुभाष चौक, पूर्णिया गोला, कॉलेज चौक और स्टेशन रोड जैसे व्यस्त इलाकों में सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में आवारा गायें दिखाई देती हैं. कई बार ये सड़क के बीच बैठ जाती हैं, जिससे वाहनों की रफ्तार थम जाती है और लंबा जाम लग जाता है.
स्थानीय लोगों के अनुसार बाइक और साइकिल सवार कई बार अचानक सामने आ जाने वाली गायों से टकराकर घायल भी हो चुके हैं. खासकर रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि अंधेरे में सड़क पर बैठी गायें समय पर दिखाई नहीं देतीं.
दुकानदारों से लेकर स्कूली बच्चों तक, हर कोई परेशान
आवारा पशुओं का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं है. बाजार के दुकानदारों का कहना है कि कई बार गायें दुकानों के सामने खड़ी होकर कूड़ा-कचरा खाने लगती हैं. इससे गंदगी फैलती है, बदबू आती है और ग्राहकों को दुकान तक पहुंचने में भी परेशानी होती है.
स्थानीय निवासी रामप्रकाश यादव का कहना है कि रात के समय दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. वहीं सीमा कुमारी बताती हैं कि स्कूल जाने वाले बच्चे भी गायों के अचानक दौड़ने से डर जाते हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है.
Madhepura News: आखिर क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं. कई पशुपालक दूध देना बंद करने के बाद गायों को खुले में छोड़ देते हैं. दूसरी ओर शहर में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं होने के कारण जगह-जगह फैला कचरा गायों को सड़कों तक खींच लाता है.
इसके अलावा पर्याप्त गौशालाओं का अभाव भी बड़ी वजह माना जा रहा है. नगर परिषद की ओर से आवारा पशुओं को पकड़कर गौशाला भेजने की बात कही जाती है, लेकिन मौजूदा गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशु होने के कारण नई गायों को रखना मुश्किल हो जाता है.
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लोगों की मांग, अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है. लोगों ने प्रशासन से नियमित अभियान चलाकर आवारा पशुओं को सड़क से हटाने, पर्याप्त गौशालाओं की व्यवस्था करने और पशुपालकों के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की है.
शहरवासियों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सड़क हादसों की संख्या और बढ़ सकती है. ऐसे में यह सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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