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लालू यादव को जमानत, गिरेगी नीतीश सरकार! तेज प्रताप के दावे और सियासी पंडितों के इस अनुमान का कारण समझिए

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
लालू यादव का परिवार
लालू यादव का परिवार
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Bihar Politics: राजद प्रमुख लालू यादव चारा घोटाले से जुड़े दुमका कोषागार मामले में जमानत मिलने के बाद आज वो जेल से रिहा होंगे, लेकिन घर नहीं लौटेंगे. अभी वो बीमार है और दिल्ली एम्स में भर्ती हैं. भले ही लालू यादव अभी बीमार होने के कारण बिहार नहीं आएंगे लेकिन राज्य की सियासत गरमा गई है. राजद सुप्रीमो के समर्थकों में अलग स्तर की खुशी है.

बीते शनिवार को जब चारा घोटाले के एक मामले में लालू यादव को जमानत मिली तो उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने पटना में जश्न मनाया. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा कर दिया कि लालू जी जैसे ही आएंगे तो नीतीश कुमार की सरकार गिर जाएगी. लालू यादव की जमानत पर नीतीश के रिएक्शन पर पलटवार करते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि उन्हें पता चल गया है कि वो जाने वाले हैं, इसलिए ऐसा बयान दे रहे हैं. बिहार में सरकार गिर गई है, ये सरकार खत्म हो चुकी है.

इधर, बड़ा सवाल ये है कि तेज प्रताप के इस दावे का आधार क्या है. क्या सच में ऐसा हो सकता है? इस बारे में सियासी जानकारों का कहना है कि यह असंभव नहीं है. अगर लालू यादव का एमवाई समीकरण चल गया तो नीतीश सरकार पर संकट आ सकता है. इसके पीछे तर्क ये है कि लालू जैसे ही बिहार आएंगे, वे पहले अपने उन नेताओं के साथ बैठक करेंगे, जो उनके खास रहें है. ये नेता वो होंगे जो यादव समाज से आते हैं.

बिहार विधानसभा में अभी 52 यादव विधायक हैं. इनमें 40 तो महागठबंधन के हैं, बाकी 12 एनडीए के. ऐसे में लालू यादव एनडीए के 12 यादव विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश करेंगे. यदि सफल रहे तो ये विधायक इस्तीफा भी दे सकते हैं. इस पूरे खेल में एनडीए की सरकार मुश्किल में आ सकती है. इसके अलावा लालू यादव की नजर ओवैसी के पार्टी एआईएमआईएम पर है जिसके पांच विधायक हैं. सभी मुस्लिम विधायक हैं. लालू यादव यादव अपने पुरानी दिनों की दुहाई देकर ओवैसी की पार्टी के पांचों विधायक को अपने पाले में डाल सकते हैं.

इसके अलावा लालू यादव मुकेश सहनी और जीतन राम मांझी से संपर्क करके अपने पाला में करने की कोशिश करेंगे. इन दोनों के पास 4-4 विधायक (वीआईपी और हम) हैं. लालू यादव इनके सहयोग से तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बना सकते हैं. हालांकि ये सिर्फ अनुमान है लेकिन राजनीति के बारे में कभी भी कुछ साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता.

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में तेजस्वी यादव ने अपने बलबूते 75 सीटों पर जीत दर्ज की , लेकिन जोड़-तोड़ करने में वो सक्षम नहीं रहे और सरकार नहीं बना पाए. उनके नेतृत्व में महागठबंधन को कुल 110 सीटों पर जीत मिली. जबकि सरकार बनाने के लिए 122 के आंकड़े तक पहुंचना था. अब अगर लालू यादव बिहार की राजनीति में सक्रिय होते हैं तो राज्य में अलग ही खेला देखने को मिलेगा.

Posted By: Utpal Kant

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