मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड सड़क को लेकर हलचल तेज, मुआवजे की दर जानने को उत्सुक दिखे किसान

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प्रतीकात्मक फोटो | Prabhat Khabar Network

Mokama Munger Greenfield Expressway: मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना ने लखीसराय जिले के ग्रामीण इलाकों में हलचल मचा दी है. रैयत और किसान जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे की राशि को लेकर चिंतित हैं, अपनी जमीनों के उचित मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं. विकास के साथ ही विस्थापन के दर्द को महसूस करते हुए, वे मकान, बोरिंग और पेड़ों के लिए भी अलग से मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

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Mokama Munger Greenfield Expressway: लखीसराय जिले के पीरीबाजार प्रखंड क्षेत्र में प्रस्तावित मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना को लेकर ग्रामीण इलाकों में हलचल तेज हो गई है. एक्सप्रेसवे के संभावित एलाइनमेंट में आने वाले गांवों के रैयतों और किसानों के बीच भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मिलने वाले मुआवजे की राशि को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. ग्रामीण परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, लेकिन साथ ही अपनी जमीनों के उचित मूल्यांकन को लेकर भी चिंतित हैं.

चौपालों पर छिड़ी जमीन और मुआवजे की बहस

सूत्रों के अनुसार, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए पीरीबाजार क्षेत्र के जिन मौजों (गांवों) में जमीन चिह्नित किए जाने की बात सामने आ रही है, वहां के किसान आपस में जमीन की मौजूदा बाजार दर (MVR) और सरकारी अधिग्रहण के नियमों की जानकारी जुटाने में जुट गए हैं. गांवों की चौपालों से लेकर खेतों तक एक ही मुख्य सवाल तैर रहा है कि प्रशासन द्वारा जमीन का मुआवजा किस दर से तय किया जाएगा.

विकास का स्वागत, लेकिन विस्थापन का दर्द भी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मोकामा से मुंगेर तक बनने वाली इस नई फोरलेन ग्रीनफील्ड सड़क से क्षेत्र में आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा. इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. हालांकि, किसानों का कहना है कि विकास के साथ उनकी उपजाऊ जमीन और आशियाने छीनने का दर्द भी जुड़ा है. इसलिए जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें पारदर्शी तरीके से वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा मिलना चाहिए.

मकान, बोरिंग व वृक्षों के अलग से मूल्यांकन की मांग

अधिग्रहण को लेकर रैयतों में जागरूकता भी देखने को मिल रही है. किसानों का कहना है कि नियमानुसार सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि अधिग्रहित क्षेत्र में आने वाले मकान, कुआं, बोरिंग, फलदार पेड़, खड़ी फसल और अन्य परिसंपत्तियों का भी पारदर्शी मूल्यांकन कर अलग से मुआवजा दिया जाना चाहिए. इसके लिए कई किसान अंचल कार्यालय (सीओ ऑफिस) और कानूनी जानकारों से भी परामर्श ले रहे हैं.

Mokama Munger Greenfield Expressway: आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार

हालांकि, मुआवजे की तय दरों को लेकर अभी तक जिला प्रशासन या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से कोई आधिकारिक गजट या अधिसूचना जारी नहीं की गई है. प्रशासनिक स्तर से स्पष्ट विवरण आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी. फिलहाल, पीरीबाजार क्षेत्र के संभावित प्रभावित ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अधिग्रहण शुरू करने से पहले ग्राम सभा का आयोजन कर सभी रैयतों को पूरी जानकारी दी जाए और मुआवजा भुगतान में कोई अनावश्यक देरी न की जाए.


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रवि राज

लेखक के बारे में

By रवि राज

रवि राज प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पीरीबाजार (लखीसराय) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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