लखीसराय के प्रो अनिल कुमार को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 02 Jun 2026 10:23 AM

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Lakhisari News : बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नई दिशा देने के लिए एक अहम नियुक्ति की गई है. लखीसराय के वलीपुर गांव निवासी प्रो. अनिल कुमार ने बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक का पदभार संभाल लिया है. उनके शैक्षणिक और पुरातात्विक अनुभव से राज्य के विरासत संरक्षण अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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लखीसराय से राजीव मुरारी सिन्हा की रिपोर्ट

Lakhisari News : बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के क्षेत्र में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया. लखीसराय जिले के पिपरिया प्रखंड अंतर्गत वलीपुर गांव निवासी प्रो अनिल कुमार ने बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया. कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अधीन कार्यरत इस महत्वपूर्ण संस्था में उनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है.

औपचारिकताएं पूरी कर संभाला पदभार

वर्तमान कार्यपालक निदेशक कृष्ण कुमार द्वारा जारी नियोजन पत्र के आलोक में प्रो. अनिल कुमार ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं. पदभार ग्रहण करने के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र और एलपीसी सहित सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए.

लखीसराय के वलीपुर गांव से जुड़ा है संबंध

प्रो. अनिल कुमार मूल रूप से लखीसराय जिले के पिपरिया प्रखंड स्थित वलीपुर गांव के निवासी हैं. वे स्वर्गीय प्रो. आरसीपी सिंह के पुत्र हैं और लंबे समय से शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं. उनकी नियुक्ति से जिले में भी खुशी का माहौल है और लोग इसे क्षेत्र के लिए गौरव की बात मान रहे हैं.

शिक्षा और पुरातत्व क्षेत्र का लंबा अनुभव

प्रो. अनिल कुमार ने पश्चिम बंगाल स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग में प्राध्यापक के रूप में अपनी पहचान बनाई है. इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे बिहार की विरासत संरक्षण योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएंगे.

विरासत संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में राज्य के पुरातात्विक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन कलाकृतियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण कार्यों को नई मजबूती मिलेगी. साथ ही युवाओं को बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ने की दिशा में भी नए प्रयास किए जा सकते हैं.

बिहार की पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का दायित्व

बिहार विरासत विकास समिति राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की शीर्ष संस्था है. समिति पुरातत्व, संग्रहालयों और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से बिहार की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का कार्य करती है.

नयी जिम्मेदारी, नयी उम्मीदें

प्रो. अनिल कुमार के कार्यभार संभालने के साथ ही राज्य की विरासत संरक्षण योजनाओं को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं. माना जा रहा है कि उनका अकादमिक अनुभव और शोध दृष्टि बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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