लखीसराय में 15 साल बाद बदलेगा लाभ का आधार, अब 2027 की जनगणना से तय होंगे सरकारी फायदे

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 29 May 2026 11:53 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Lakhisarai Census 2027 : देश में 15 साल बाद जनगणना का बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब तक 2011 की जनगणना के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था, लेकिन 2027 से नई जनगणना लागू होने के बाद करोड़ों लोगों के लिए तस्वीर बदल सकती है.

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लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट.

Lakhisarai Census 2027 : लंबे इंतजार के बाद अब जनगणना 2027 का लाभ लोगों को मिलने जा रहा है. मार्च 2027 से नई जनगणना लागू कर दी जाएगी और 2011 की जनगणना को समाप्त कर दिया जाएगा. फिलहाल जिले में जनगणना के प्रथम चरण यानी मकान गणना का कार्य पूरा कर लिया गया है. प्रशासन का दावा है कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही यह काम पूरा कर लिया गया.

समय से पहले पूरा हुआ मकान गणना का काम

जानकारी के अनुसार जनगणना के पहले चरण में मकान गणना का कार्य 31 मई तक पूरा किया जाना था, लेकिन प्रगणकों और सुपरवाइजरों ने दो दिन पहले ही यह काम समाप्त कर लिया. अब मकान गणना के दौरान जुटाए गए आंकड़ों को तय फॉर्मेट में भरकर कंप्यूटर पर अपलोड किया जाएगा.

दिल्ली भेजी जाएगी आंकड़ों की रिपोर्ट

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक प्रथम चरण के बाद अब कार्यालयी कार्य शुरू होगा. मकानों से जुड़े आंकड़ों को डिजिटल रूप से अपलोड करने के बाद उसकी एक प्रति जिलाधिकारी के आदेशानुसार दिल्ली भेजी जाएगी. इससे जनगणना की आगे की प्रक्रिया को गति मिलेगी.

जनवरी 2027 में होगा दूसरा बड़ा चरण

मकान गणना के बाद अब दूसरे चरण में जनवरी 2027 के दौरान लोगों की वास्तविक जनगणना की जाएगी. प्रशासन का लक्ष्य है कि जनवरी में जनगणना पूरी कर फरवरी तक सभी आंकड़ों को कंप्यूटर में अपलोड कर दिया जाए. इसके बाद मार्च 2027 से नई जनगणना प्रभावी हो जाएगी.

सरकारी योजनाओं पर पड़ेगा सीधा असर

नई जनगणना लागू होने के बाद सरकारी योजनाओं, लाभार्थियों की संख्या और कई सामाजिक योजनाओं के आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल सकता है. अब तक 2011 की जनगणना के आधार पर ही लोगों को विभिन्न सरकारी लाभ दिए जा रहे थे.

डीएम ने लोगों से की खास अपील

जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति की गणना किसी कारणवश छूट गई हो तो वे तुरंत अपने बीएलओ से संपर्क करें, ताकि उनका नाम भी जनगणना में शामिल किया जा सके.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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