बभनगावां का रहस्मयी नाग मंदिर : यहां होती है साक्षात नाग-नागिन की पूजा

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 04 Jun 2026 8:49 AM

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Lakhisari News : बिहार के लखीसराय जिले में एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर है, जहां नागपंचमी की रात चढ़ाया गया दूध और लावा सुबह तक रहस्यमय तरीके से गायब हो जाता है. हैरानी की बात यह है कि सदियों से यह परंपरा निभ रही है, लेकिन आज तक किसी ने नाग देवता को भोग ग्रहण करते नहीं देखा.

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लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट

Lakhisari News : लखीसराय जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत बभनगावां गांव स्थित प्राचीन नाग मंदिर आस्था, परंपरा और रहस्य का अनूठा संगम है. नागपंचमी के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नाग देवता को चढ़ाया जाने वाला दूध और लावा एक ही परिवार द्वारा पीढ़ियों से अर्पित किया जाता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि रात में रखा गया भोग सुबह तक पूरी तरह गायब हो जाता है, जिससे इस मंदिर का रहस्य और भी गहरा हो जाता है.

सदियों से निभ रही है अनोखी परंपरा

बभनगावां के इस प्राचीन नाग मंदिर में नागपंचमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. ग्रामीणों के अनुसार, कई पीढ़ियों से एक ही परिवार नाग देवता के लिए दूध और लावा लेकर आता है. यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और नियम के साथ निभाई जा रही है. मंदिर में दिनभर पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

रात में रखा जाता है भोग, सुबह मिलता है खाली बर्तन

नागपंचमी की रात मिट्टी के बर्तन में दूध और लावा रखकर मंदिर परिसर में छोड़ दिया जाता है. ग्रामीण बताते हैं कि अगली सुबह बर्तन खाली और उल्टा पड़ा मिलता है. आश्चर्य की बात यह है कि आसपास किसी जानवर या व्यक्ति के आने-जाने का कोई निशान नहीं दिखाई देता. इसी कारण लोग इसे नाग देवता की दिव्य लीला मानते हैं.

नाग देवता को देखने की कोशिश और रहस्यमयी किंवदंती

गांव में एक प्रचलित कथा आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. मान्यता है कि सदियों पहले एक व्यक्ति ने पेड़ पर चढ़कर नाग देवता को भोग ग्रहण करते देखने का प्रयास किया था. अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई. हालांकि यह एक स्थानीय किंवदंती है, लेकिन इसी कथा ने मंदिर के रहस्य और श्रद्धा को और गहरा बना दिया है.

एक ही वंश के पुजारी और सेवक संभालते हैं परंपरा

ग्रामीण मृत्युंजय सिंह के अनुसार, उनके पूर्वजों से लेकर आज तक उनका परिवार ही नाग देवता के लिए दूध और लावा अर्पित करता आ रहा है. वहीं मंदिर में पूजा-अर्चना कराने वाले पुजारी भी एक ही वंश से जुड़े हैं. यह परंपरा वर्षों से बिना किसी बदलाव के जारी है.

मनोकामना पूरी होने की है मान्यता

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है. यही कारण है कि नागपंचमी के अलावा भी श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. समय के साथ मंदिर का स्वरूप भव्य हुआ है, लेकिन इसकी आस्था और परंपरा आज भी वैसी ही बनी हुई है.

आस्था, रहस्य और परंपरा का अद्भुत संगम

बभनगावां का प्राचीन नाग मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोकविश्वास और सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत प्रतीक है. नागपंचमी के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक दौर में भी लोगों की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई है.

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