बढ़ रहा है नदियों का जल स्तर

Published at :08 Sep 2016 5:28 AM (IST)
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बढ़ रहा है नदियों का जल स्तर

बारिश का प्रभाव. गंगा, किऊल व हरूहर नदी में फिर बाढ़ के आसार सोमवार से हो रही बारिश के बाद जिले की विभिन्न नदियों के जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है. इससे शहर में जगह-जगह जलजमाव की स्थिति हो गयी है. लोगों को घरों से निकलने में भी परेशानी हो रही है. लखीसराय : बीते […]

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बारिश का प्रभाव. गंगा, किऊल व हरूहर नदी में फिर बाढ़ के आसार

सोमवार से हो रही बारिश के बाद जिले की विभिन्न नदियों के जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है. इससे शहर में जगह-जगह जलजमाव की स्थिति हो गयी है. लोगों को घरों से निकलने में भी परेशानी हो रही है.
लखीसराय : बीते सोमवार से रुक-रुक कर जारी मूसलधार बारिश के चलते शिथिल पड़ी गंगा, किऊल एवं हरूहर नदियों में एक बार फिर उफान है. समाहरणालय परिसर के जिला व्यवहार न्यायालय, जिला उत्पाद कार्यालय, कल्याण डूडा, जन शिकायत, जिला नियोजनालय व डीआरडीए हॉल के समीप जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. लखीसराय जिला मुख्यालय के समाहरणालय के पुराने भवन की तरफ भी सड़कों पर पानी जमा हो जाने से अधिवक्ताओं, कर्मियों एवं जनसामान्य को पानी से गुजर कर संबंधित कार्यालयों का सफर करना पड़ता है. इसके अलावा जिले के कई अन्य इलाकों में भी 48 घंटों की झमाझम बारिश से भीषण जलजमाव हो रहा है.
किऊल नदी में बढ़ रहा है पानी: किऊल नदी में तेज गति से पहाड़ी पानी गिरने का दौर प्रारंभ हो गया है. खेत, खलिहान, बहियार, ग्रामीण सड़कें चारों ओर पानी ही पानी फैलने लगा है. संभवत: जिले की तीनों नदियों की तेज रफ्तार से बढ़ती जल स्तर के चलते बाढ़ग्रस्त इलाकों में नये सिरे से बाढ़ का कहर बरपा सकता है.
लोगों का अपने-अपने घर से निकलना कठिन प्रतीत होने लगा है. इस बार मूसलधार बारिश से खासकर जिले स्थित चानन, लखीसराय, रामगढ़ चौक एवं हलसी के धनहर इलाकों में जलजमाव एवं बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है. हालांकि जिला आपदा प्रबंधन की ओर से इन इलाकों को बाढ़ ग्रसित क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है. बावजूद इसके नहर, पइन, डैम, बराज, आहार, पोखर में जल संचय केंद्रों में बरसात का पानी लबालब भर गया है. इससे मवेशियों के समक्ष चारा संकट पैदा हो गया है. जगह-जगह जानवरों के लाशों की बदबू, शौचालयों के प्रदूषित जल फैल रहा है.
चल रहे पांच राहत केंद्र
जिला आपदा प्रभारी पदाधिकारी मंजु प्रसाद ने बताया कि जल स्तर में जारी वृद्धि के मद्देनजर हर संभव प्रशासनिक पहल की जायेगी. फिलहाल बड़हिया प्रखंड में पांच बाढ़ राहत केंद्र संचालित किये जा रहे हैं.
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