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नक्सलियों के गढ़ में पूर्व नक्सली की गोली मार कर हत्या, छह महीने पूर्व ही जेल से छूटा था कारेलाल कोड़ा

Updated at : 12 Oct 2019 2:39 PM (IST)
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नक्सलियों के गढ़ में पूर्व नक्सली की गोली मार कर हत्या, छह महीने पूर्व ही जेल से छूटा था कारेलाल कोड़ा

नक्सलियों के गढ़ में शनिवार को एक पूर्व नक्सली रहे कारेलाल कोड़ा की गोली मार कर हत्या कर दी गयी.

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लखीसराय / कजरा : नक्सलियों के गढ़ में शनिवार को एक पूर्व नक्सली रहे कारेलाल कोड़ा की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. घटना की जानकारी मिलने के बाद पीरीबाजार थानाध्यक्ष गजेंद्र कुमार ने पुलिस, एसटीएफ व सीआरपीएफ जवानों के सहयोग से पीरीबाजार थाना क्षेत्र के लठिया कोड़ासी के सुरका कोल से शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. पुलिस के अनुसार आपसी रंजिश में घटना को अंजाम दिया गया है. इसको लेकर संभावित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार पीरीबाजार थाना क्षेत्र के घोघी कोड़ासी निवासी कारेलाल कोड़ा का शव शनिवार की सुबह पीरीबाजार थाना क्षेत्र के ही पहाड़ी और पूरी तरह से नक्सल प्रभावित क्षेत्र लठिया कोड़ासी स्थित एक झाड़ी में देखे जाने के बाद लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी. इसके बाद पुलिस की टीम घटनास्थल पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया. शव देखने से प्रतीत हो रहा था कि किसी ने विश्वास में लेकर नजदीक से पेट में गोली मारी है. गोली दूसरे दिशा से पेट को चीरते हुए निकल गयी है. हत्या करने के बाद शव को झाड़ी के पास इस तरह से रख दिया गया था कि मानो वह थका-हारा सोया हुआ हो. जमीन पर एक चादर बिछाकर उस पर शव को रख कर मृतक के सिर के नीचे बिछावन (गेंदड़ा) रख दिया गया था तथा ऊपर एक गमछा डाल दिया गया था.

पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि मृतक का भी आपराधिक इतिहास रहा है. वह कुछ समय पूर्व ही जेल से छूट कर बाहर आया था. घटना आपसी रंजिश का परिणाम बताया जा रहा है. मृतक के परिजनों के अनुसार उसे शुक्रवार की रात को घर से बुलाकर ले जाया गया था. सुबह उसकी मौत की खबर मिली है. एसपी कुमार ने बताया कि परिजनों ने जिस शख्स का नाम घर से बुलाकर ले जाने के लिए लिया है, उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. इसे नक्सल वारदात नहीं कहा जा सकता है.

घोघी कोड़ासी निवासी कारेलाल कोड़ा विगत छह माह पूर्व ही जेल से बाहर आया था. वह एक नक्सली घटना को लेकर जेल में बंद था. सूत्रों की मानें तो जेल से छूटने के बाद मृतक कारेलाल नक्सली संगठन से अपनी दूरी बना ली थी तथा स्वयं छोटी-मोटी ठेकेदारी का कार्य कर जीवनयापन कर रहा था. वहीं, कुछ लोग उसके पुलिस के साथ अच्छे संबंध भी बता रहे थे. घटना को देख कर प्रथम दृष्टया इसे लोग नक्सली घटना मानने से इनकार तो कर रहे हैं. लेकिन, दबी जुबान से घटना में नक्सलियों के हाथ होने से इनकार भी नहीं कर रहे है. चर्चा कर रहे थे कि नक्सलियों के गढ़ में इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत भी शायद ही कोई कर सकता है. मृतक कारेलाल कोड़ा अपने पीछे पत्नी सहित दो पुत्री व एक पुत्र छोड़ गये.

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