गेहूं फसल समेटने में जोर-शोर से लगे किसान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Apr 2018 5:30 AM (IST)
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मक्का फसल बर्बाद होने के बाद वर्षा से पूर्व गेहूं की फसल को सुरक्षित करने में जुटे हैं अन्नदाता लखीसराय : मौसम के गुरुवार को बदलते मिजाज से किसानों का दिल दहलने लगा है. किसान अपने-अपने खेत से गेहूं के फसल को काट-बांध कर सुरक्षित करने में जोर-शोर से लग गये हैं. गुरुवार की सुबह […]
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मक्का फसल बर्बाद होने के बाद वर्षा से पूर्व गेहूं की फसल को सुरक्षित करने में जुटे
हैं अन्नदाता
लखीसराय : मौसम के गुरुवार को बदलते मिजाज से किसानों का दिल दहलने लगा है. किसान अपने-अपने खेत से गेहूं के फसल को काट-बांध कर सुरक्षित करने में जोर-शोर से लग गये हैं. गुरुवार की सुबह से ही छिटपुट बूंदाबांदी व तेज हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. गेहूं की फसल पककर खेतों में तैयार है. पत्थर-पानी का प्रकोप से अभी तक इस जिले के अधिकांश क्षेत्र के किसान बचे हुए हैं.गुरुवार को बड़हिया, पिपरिया एवं सूर्यगढ़ा समेत लखीसराय के कुछ भागों में तेज हवा के साथ छिटपुट बारिश भी हुई है. मौसम का कोई ठिकाना नहीं है, यह सोचकर किसान अपने-अपने खेतों में लगे गेहूं के तैयार फसल की कटनी के लिए ऐड़ी-चोटी एक कर रखे हैं.
किसान कृष्णा यादव, सदानंद यादव समेत कई किसानों ने बताया कि चना का फसल वे सब काटकर सुरक्षित कर रखे हैं, लेकिन गेहूं के फसल खेतों में पककर तैयार है. गेहूं के फसल के कटनी के लिए मजदूरों की संख्या बढ़ाकर कटनी का कार्य किया जा रहा है. किसानों का कहना है कि ऐसे मौसम में पत्थर और बारिश की संभावनाएं होती है. यहीं कारण है कि सुबह 5 बजे से ही गेहूं के फसल काटने के लिए मजदूरों को लगा दिया जाता है. किसानों का मानना है कि फसल कटनी के बाद गेंहू के फसल का बोझा बांधकर रखने के बाद हल्की बारिश एवं पत्थर पड़ने से गेहूं की कोई खास नुकसान नहीं होता है.
जिला उद्यान पदाधिकारी सह पौधा संरक्षण पदाधिकारी डॉ अरुण कुमार का कहना है कि इस बार गेहूं के फसल पकने तक बारिश नहीं हुई है. जिसके कारण गेहूं के फसल को कोई नुकसान नहीं है. उन्होंने कहा कि जिले के किसानों को भयभीत होने की जरुरत नहीं है. अधिक बारिश होने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है. इधर मक्का के फसल को लेकर उन्होंने बताया कि पिछात मक्का के फसल में दाना आ चुका है. इधर डीएओ महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं के फसल को हार्वेस्टर एवं वीपर वाईडर से काटने एवं दाना निकालने के कृषि बैंक यंत्र की स्थापना किया जाना है. फसल कटनी के लिये मेदनी चौकी में कृषि बैंक यांत्रिकीकरण संचालित हो रहा था. जिससे किसान यंत्र भाड़े पर लेकर कटनी छटनी कर सकते थे. वर्तमान में वह कृषि यंत्र बैंक समाप्त हो चुका है. किसानों को फसल कटनी एवं छटनी के लिये विभाग द्वारा वर्तमान में यंत्र उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है.
किसानों को मिलेगा बीज. सूर्यगढा . हरित क्रांति योजना के तहत किेसानों हो गरमा मुंग एवं ढेंचा का बीज उपलब्ध कराया जायेगा. किसान सलाहकार अंगद कुमार ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर किसानों को बीज उपलब्ध
करा दिया जायेगा.
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