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अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन परियोजना में शामिल टीम के सदस्यों को रेल मंत्री ने किया सम्मानित

Updated at : 30 Oct 2025 7:35 PM (IST)
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अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन  परियोजना  में शामिल टीम के सदस्यों को रेल मंत्री ने किया  सम्मानित

अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन परियोजना और बइरबी-सायरंग रेल परियोजना के सफल समापन के बाद इन दोनों परियोजनाओं में शामिल रेलवे टीम को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया है.

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ठाकुरगंज. अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन परियोजना और बइरबी-सायरंग रेल परियोजना के सफल समापन के बाद इन दोनों परियोजनाओं में शामिल रेलवे टीम को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया है. इस दौरान रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) के महाप्रबंधक अरुण कुमार चौधरी के साथ कई वरीय पदाधिकारी मौजूद थे. बताते चले पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अंतर्गत 110.75 किलोमीटर लंबी अररिया – गलगलिया ब्रॉड गेज लाइन परियोजना, रेल संरक्षा आयुक्त सुमीत सिंघल द्वारा 9 से 11 जुलाई 2025 तक किए गए वैधानिक निरीक्षण के बाद पूर्ण रूप से पूरी हो गई थी . वहीं 15 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अररिया- गलगलिया (ठाकुरगंज) नई रेल लाइन खंड में ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो परियोजना के परिचालन में एक प्रमुख मील का पत्थर है. अब सभी खंडों, जिसमें रहमतपुर – पौआखाली खंड शामिल है, को चालू कर दिया गया है, इस लाइन में 64 बड़े पुल, 264 छोटे पुल और 15 स्टेशन हैं. इसे 100 किमी प्रति घंटा की गति से ट्रेन संचालन के लिए अधिकृत किया गया है, जो बिहार और आसपास के क्षेत्रों में संपर्क को मजबूत करने तथा क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा. वहीं बइरबी-सायरंग नई लाइन रेलवे परियोजना, पूर्वोत्तर के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर, मिजोरम की राजधानी आइजॉल को पहली बार रेल संपर्क प्रदान करती है, जिससे राज्य को भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में एकीकृत किया गया है. इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 13 सितंबर 2025 को आइजोल, मिजोरम में किया गया. 51.38 किमी तक फैली हुई यह परियोजना उल्लेखनीय इंजीनियरिंग का प्रदर्शन करती है, जिसमें 45 सुरंगें, 143 पुल (जिनमें से एक कुतुब मीनार से भी ऊंचा है) और हरतकी, कानपुई, मुअलखांग तथा सायरंग में चार नए स्टेशन शामिल हैं . क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भूभाग और प्रतिकूल मौसम के बावजूद, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) टीम ने इस जटिल परियोजना को सफलतापूर्वक निष्पादित किया, जिससे मिजोरम और व्यापक पूर्वोत्तर में व्यापार, पर्यटन तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को बहुत बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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