वाद्य यंत्र पहुंचे पर संगीत शिक्षक नदारद, ठाकुरगंज के सरकारी स्कूलों में 'शोपीस' बनीं लाखों की म्यूजिकल किट; धूल फांक रहे हारमोनियम-तबला

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 26 May 2026 3:21 PM

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म्यूजिकल किट

Thakurganj School Music Kit: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों की सांस्कृतिक प्रतिभा को निखारने का एक और सरकारी मंसूबा जमीन पर दम तोड़ता नजर आ रहा है. किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड में समग्र शिक्षा अभियान के तहत लाखों रुपये के वाद्य यंत्र तो भेज दिए गए हैं, लेकिन उन्हें बजाने और बच्चों को सिखाने के लिए एक भी उस्ताद (संगीत शिक्षक) मयस्सर नहीं है.

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Thakurganj School Music Kit: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत आने वाले सरकारी विद्यालयों में शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही और अदूरदर्शिता का मामला सामने आया है. समग्र शिक्षा अभियान (वार्षिक कार्य योजना 2025-26) के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में छात्र-छात्राओं के बीच संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महंगे वाद्य यंत्रों का पूरा सेट (म्यूजिकल किट) उपलब्ध कराया गया है.

विभाग ने आनन-फानन में स्कूलों को हारमोनियम, तबला जोड़ी, ढोलक, बैंजो/गिटार, मंजीरा, झांझ तथा घुंघरू तो भेज दिए हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि जिन स्कूलों में ये नाजुक उपकरण भेजे गए हैं, वहां संगीत विषय के शिक्षक ही तैनात नहीं हैं. नतीजा यह है कि लाखों रुपये की सरकारी लागत से खरीदे गए ये उपकरण फिलहाल स्कूलों के बंद कमरों और प्रधानाध्यापक के कार्यालयों में सिर्फ ‘शोपीस’ बनकर रह गए हैं.

सामान्य शिक्षकों को नहीं है कोडिंग-ट्यूनिंग का ज्ञान, बंद पड़े-पड़े खराब होने का खतरा

ब्लॉक के कई विद्यालयों के शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए बताया कि वे सामान्य विषयों (भाषा, गणित, विज्ञान) के शिक्षक हैं और उन्हें संगीत विधा या इन शास्त्रीय वाद्य यंत्रों को ट्यून करने व बजाने का कोई व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिला है.

शिक्षक चाहकर भी बच्चों को इसका सही प्रशिक्षण नहीं दे पा रहे हैं. नियमित उपयोग और रखरखाव न होने की वजह से इन कीमती यंत्रों के डिलेमिनेट होने, कड़े होने और चूहे द्वारा काटे जाने का खतरा बढ़ गया है.

घटिया खरीद की खुली पोल: कई स्कूलों में पहुंचे डैमेज्ड वाद्य यंत्र

इस सरकारी आपूर्ति योजना में केवल शिक्षकों की कमी ही एकमात्र रोड़ा नहीं है, बल्कि आपूर्ति किए गए सामानों की गुणवत्ता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. कई प्राथमिक और मध्य विद्यालयों से यह बात खुलकर सामने आई है कि डिलीवरी के समय ही कई वाद्य यंत्र क्षतिग्रस्त (डैमेज्ड) अवस्था में थे.

कुछ स्कूलों के हेडमास्टरों ने शिकायत की है कि आपूर्ति किए गए तबले की खाल फटी हुई है, ढोलक की ट्यूनिंग खराब है और हारमोनियम के री़ड सही से काम नहीं कर रहे हैं. इससे विभाग की खरीद प्रक्रिया और टेंडर की गुणवत्ता पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए हैं.

बुनियादी सुविधाओं का टोटा, शिक्षा प्रेमियों ने जताई गहरी चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों के कई मध्य विद्यालयों में तो इन कीमती और नाजुक वाद्य यंत्रों को सुरक्षित, नमी-मुक्त और सीलन से दूर रखने के लिए अलमारी या लॉकर जैसी बुनियादी व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है. स्कूल प्रबंधनों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग वास्तव में बच्चों को हुनरमंद बनाना चाहता है, तो केवल सामान भेजने के बजाय अविलंब संगीत शिक्षकों की बहाली करे या वर्तमान शिक्षकों को इसके लिए विशेष क्रैश कोर्स (ट्रेनिंग) दे, तभी इस योजना का वास्तविक लाभ गरीब बच्चों तक पहुंच सकेगा.

इलाके के प्रबुद्ध नागरिकों और शिक्षा प्रेमियों का कहना है कि संगीत बच्चों के मानसिक, आत्मिक और सांस्कृतिक विकास का एक सशक्त माध्यम है. लेकिन बिना गुरु के ज्ञान की कल्पना बेमानी है. फिलहाल, ठाकुरगंज के सरकारी स्कूलों में सजे ये तबले, ढोलक और हारमोनियम बच्चों की बंद प्रतिभा को सुर देने के बजाय प्रशासनिक उदासीनता की धूल फांक रहे हैं.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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