करोड़ों की योजना, सूखता पोखर और बदहाल पार्क! भातढाला की हालत पर उठे बड़े सवाल

बदहाल भातढाला पार्क व पोखर
Thakurganj Bhatdhala Park: कभी जल-जीवन-हरियाली अभियान का मॉडल स्थल रहा ठाकुरगंज का भातढाला पार्क और पोखर आज सरकारी उदासीनता के कारण पूरी तरह बदहाली की कहानी बयां कर रहा है. पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रतीक के रूप में करोड़ों की लागत से विकसित यह महत्वपूर्ण स्थल आज रख-रखाव के अभाव में अपनी चमक खोता जा रहा है, जिससे स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों में भारी निराशा संधारित है.
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Thakurganj Bhatdhala Park: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी पर्यावरण संरक्षण योजनाओं की जमीनी हकीकत को बयां करती एक बेहद निराशाजनक तस्वीर किशनगंज जिला अंतर्गत ठाकुरगंज प्रक्षेत्र से सामने आई है. जल-जीवन-हरियाली मिशन के तहत कड़क दावों के साथ करोड़ों रुपये की लागत से संधारित किया गया ऐतिहासिक भातढाला पार्क और पोखर वर्तमान समय में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है. जिस परियोजना को पूरे सीमांचल में जल और पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी मिसाल के रूप में पेश किया गया था, वह आज विभागीय अनदेखी के चलते पूरी तरह विसंगतियों का मुख्य केंद्र बन चुका है.
टूटी रेलिंग और फैली झाड़ियां; अव्यवस्थाओं का टापू बना भातढाला पार्क
पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार से भीतर कदम रखते ही प्रशासनिक कप्तानों के दावों की पोल लाइव खुल जाती है. परिसर के चारों तरफ टूटी हुई लोहे की रेलिंग, कंक्रीट के पैदल मार्गों पर उगी कटीली झाड़ियां और जगह-जगह बिखरा कचरा यहां की नई पहचान बन चुके हैं. शाम के समय कनिष्ठ व वरिष्ठ नागरिकों के भ्रमण और बच्चों के खेलने के लिए बनाया गया यह सुंदर पर्यावरणीय स्थल अब पूरी तरह असुरक्षित और जर्जर हो चुका है. स्थानीय दुकानदारों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि नियमित सफाई और कड़क कमान न होने की वजह से पर्यटकों का इस पार्क से पूरी तरह मोहभंग हो गया है.
पोखर के घटते जलस्तर से मंडराया संकट; कभी मुख्यमंत्री ने किया था कड़क उद्घाटन
पार्क की बदहाली से भी अधिक चिंता का विषय ऐतिहासिक भातढाला पोखर का लगातार घटता जलस्तर है. यदि समय रहते जल संवर्धन और गाद सफाई की दिशा में ठोस प्रशासनिक कमान नहीं कसी गई, तो यह आदर्श पोखर बहुत जल्द पूरी तरह सूख जाएगा, जिससे आसपास के भूजल स्तर पर भी कड़ा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
गौरतलब है कि जनवरी 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत बेहद मुस्तैदी से विकसित किए गए इस भातढाला पोखर का भव्य उद्घाटन किया था. उस समय पोखर के जीर्णोद्धार, सोख्ता निर्माण, पोषण वाटिका और पर्यावरण संवर्धन से जुड़े तमाम कड़े कार्यों पर भारी सरकारी राशि खर्च की गई थी.
वन विभाग के जिम्मे है कमान; नागरिक कप्तानों ने उठाई जांच की मांग
इस पूरे प्रोजेक्ट के रख-रखाव और सुरक्षा की कमान वर्ष 2021 से वन विभाग के जिम्मे संधारित है. इसके बावजूद धरातल पर पार्क और पोखर की निरंतर बिगड़ती स्थिति को देखकर स्थानीय ग्रामीण कप्तानों ने अब सीधे वन विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. लोगों का सीधा सवाल है कि आखिर करोड़ों रुपये का बजट आवंटित होने और बकायदा विभागीय मुस्तैदी के बावजूद यह महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल कबाड़ में क्यों तब्दील होता जा रहा है.
स्थानीय नागरिकों ने जिला पदाधिकारी किशनगंज से अविलंब इस विसंगति में हस्तक्षेप करने और सौंदर्यीकरण के लिए कनिष्ठ अभियंताओं की टीम मुस्तैद करने की कड़क मांग की है, ताकि आने वाले समय में ठाकुरगंज का यह गौरवशाली पर्यावरणीय स्थल अपनी वास्तविक पहचान खोने से पूरी तरह बच सके.
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By दिव्यांशु प्रशांत
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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