आरबीएसके से बदल रही है बच्चों की ज़िंदगी: सीएस

स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ऐसे बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है जो जन्मजात बीमारियों से पीड़ित हैं
किशनगंज
स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ऐसे बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है जो जन्मजात बीमारियों से पीड़ित हैं. इसी कड़ी में आज दो मासूम मरीज परी कुमारी और सिफत प्रवीण को क्लबफुट रोग के रूटीन जांच एवं उपचार के लिए सदर अस्पताल किशनगंज से जेएलएनएमसीएच भागलपुर के लिए रवाना किया गया.आरबीएसके का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकृतियों, रोगों और विकास संबंधी समस्याओं की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार प्रदान करना है. किशनगंज जिले में यह योजना लगातार सक्रिय है और स्वास्थ्य टीम गांव-गांव जाकर स्कूली व आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की जांच कर रही है.
क्लबफुट क्या है और इसका इलाज क्यों जरूरी
क्लबफुट एक जन्मजात शारीरिक विकृति है जिसमें बच्चे के पैर मुड़ जाते हैं और सामान्य रूप से सीधा नहीं हो पाता. यदि समय पर इलाज न मिले, तो बच्चे को चलने-फिरने में स्थायी दिक्कतें हो सकती हैं. आरबीएसके टीम द्वारा ऐसे मामलों की पहचान प्रारंभिक अवस्था में कर ली जाती है, जिससे इलाज आसान और अधिक सफल हो पाता है. भागलपुर मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बच्चों का उपचार करती है, जहां से कई बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर लौट चुके हैं.
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के बच्चों को जन्मजात विकृतियों और बीमारियों से मुक्ति दिलाने का सतत प्रयास किया जा रहा है. परी कुमारी और सिफत प्रवीण जैसे बच्चों का उपचार पूरी तरह निशुल्क कराया जा रहा है. हमारी कोशिश है कि कोई भी बच्चा आर्थिक या सामाजिक कारणों से इलाज से वंचित न रहे. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि जिले में अब तक कई ऐसे बच्चे हैं जो क्लबफुट, क्लीफ्ट लिप, हियरिंग लॉस और अन्य विकृतियों से पीड़ित थे, लेकिन आरबीएसके योजना की मदद से उनका जीवन सामान्य हो सका है. इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को काफी राहत मिली है. स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी बच्चा उपचार से वंचित न रहे.डीपीएम डॉ मुनाजिम ने बताया कि कई बार माता-पिता जागरूकता के अभाव में शुरुआती लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं. यदि जन्म के बाद ही पैर, होंठ या सुनने जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए
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