जोगबनी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी की लेट-लतीफी से यात्री बेहाल, रूट बदलने की उठी मांग

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जोगबनी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी की लेट-लतीफी से यात्री बेहाल, रूट बदलने की उठी मांग

जोगबनी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी की लेट-लतीफी से यात्री बेहाल, रूट बदलने की उठी मांग

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कटिहार होकर जाने में घंटों की देरी. अररिया-पौआखाली-ठाकुरगंज मार्ग से चलाने पर बचेंगे दो घंटे

ठाकुरगंज. अपने प्रारंभिक स्टेशन जोगबनी से नियत समय पर खुलने के बावजूद जोगबनी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस (15723) यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है. मार्ग की व्यस्तता व बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह ट्रेन प्रतिदिन गंतव्य तक पहुंचने में घंटों की देरी कर रही है. यात्रियों व रेल यात्री समिति ने अब इस ट्रेन को अररिया के बाद पौआखाली-ठाकुरगंज होकर डाइवर्ट करने की जोरदार मांग उठाई है.

घंटों की देरी बनी प्रतिदिन की नियति

जोगबनी से सुबह पांच बजे खुलने वाली यह ट्रेन अररिया तक तो समय पर पहुंचती है, लेकिन इसके बाद यात्रियों की फजीहत शुरू हो जाती है. पिछले एक सप्ताह से यह ट्रेन पूर्णिया में डेढ़ घंटा व कटिहार में दो घंटा तक विलंब हो रही है. सिलीगुड़ी पहुंचते-पहुंचते यह देरी तीन घंटे तक खिंच जाती है. यात्रियों का कहना है कि ट्रेन समय पर शुरू होती है, लेकिन रास्ते में लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों को पास देने के लिए इसे छोटे स्टेशनों पर घंटों खड़ा कर दिया जाता है.

व्यस्त ट्रैक व सिंगल लाइन है मुख्य बाधा

जानकारों के अनुसार, कटिहार-किशनगंज रेल खंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है. ट्रैक की क्षमता से अधिक ट्रेनों का दबाव होने के कारण पैसेंजर और इंटरसिटी ट्रेनों को किनारे कर दिया जाता है. इसके अतिरिक्त, वर्तमान रूट पर सिंगल लाइन सिस्टम होने के कारण क्रॉसिंग में भी काफी समय नष्ट होता है. रेलवे की इस कार्यप्रणाली से यात्रियों में भारी रोष है.

नया रूट: कम दूरी और समय की बचत

वर्तमान में यह ट्रेन 311 किमी का सफर तय कर साढ़े छह घंटे में सिलीगुड़ी पहुंचती है. यदि इसे अररिया-पौआखाली-ठाकुरगंज होकर चलाया जाए, तो दूरी घटकर मात्र 222 किमी रह जाएगी. इससे न केवल यात्रा का समय दो घंटे कम होगा, बल्कि कटिहार की भीड़भाड़ वाले ट्रैक से भी निजात मिलेगी.

रेल यात्री समिति ने उठाई आवाज

ठाकुरगंज रेल यात्री समिति के संयोजक सह मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल, उपाध्यक्ष अरुण सिंह और सचिव अमित सिन्हा ने बताया कि कटिहार से सिलीगुड़ी के लिए पहले से ही दर्जनों ट्रेनें उपलब्ध हैं. ऐसे में इस इंटरसिटी को ठाकुरगंज के रास्ते चलाना ही तर्कसंगत है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि रेलवे प्रशासन अपनी ””कुंभकर्णी निद्रा”” से नहीं जागा, तो आंदोलन तेज किया जाएगा.

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अवधेश कुमार

लेखक के बारे में

By अवधेश कुमार

अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.

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