आधी आबादी को टिकट देने से बचते हैं राजनीतिक दल
Updated at : 19 Oct 2025 7:18 PM (IST)
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जिले के चारों विधानसभा सीट से करीब चार से पांच दर्जन उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकेंगे
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-भाजपा को छोड़ किसी ने नहीं जताया नारी शक्ति पर भरोसा.
-जिले में पांच दशकों से नहीं चुनी गयी आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला.-भाजपा ने दो महिला उम्मीदवार को दिया टिकट.
-किशनगंज सदर सीट से स्वीटी सिंह और कोचाधामन से वीणा देवी होगी उम्मीदवार.रामबाबू, किशनगंजआधी आबादी को आरक्षण की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियां आधी आबादी को टिकट देने से परहेज है.यदि कुछ मौकों को छोड़ दें तो हमेशा से जिले के विधानसभा क्षेत्रों में पुरुषों की ही दावेदारी रही है.
हर स्तर पर नारी सशक्तिकरण और आधी आबादी के प्रतिनिधत्व की बात उठती रहती है लेकिन पंचायत चुनाव को छोड़ देश और राज्य की राजनीति में आज भी जिले की आधी आबादी हाशिये पर है. विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में भले ही इनको नजर अंदाज किया जाता रहा हो लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि के रूप में आधी आबादी जिला परिषद के अध्यक्ष तक पहुंचने में सफल रही हैं. साठ के दशक में जिले में महिला विधायक जीत का परचम लहरा चुकी है. लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को छोड़ किसी पार्टी ने नारी शक्ति पर भरोसा नहीं जताया है. वैसे तो जिले के चारों विधानसभा सीट से करीब चार से पांच दर्जन उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकेंगे क्योंकि अभी नामांकन चल ही रह है.परंतु,महिला प्रत्याशी की बात करें तो भाजपा को छोड़ किसी राजनीतिक दल ने महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है.अब तक कि स्थिति से तो ऐसा ही लगता है.भाजपा ने दिया दो महिला को टिकट
किशनगंज सदर सीट से भाजपा की प्रत्याशी स्वीटी सिंह और कोचाधामन से वीणा देवी उम्मीदवार हैं,यानी कुल मिलाकर जिले के चार में से दो सीट पर चुनाव लड़ रही भाजपा ने दोनों ही सीट पर महिला उम्मीदवार को उतारा है. जो इन विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवार का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. हालांकि,अभी तक जिले में अन्य किसी दलों ने आधी आबादी पर भरोसा नहीं जताया है. नामांकन के अंतिम क्षणों तक कोई दल महिला उम्मीदवार को टिकट दे या निर्दलीय मैदान में उतरें तो अलग बात होगी. इस तरह देखा जाए तो जिले की चारों विधानसभा सीट से दर्जनों उम्मीदवार मैदान में उतर रहें हैं. प्रत्याशियों के बीच केवल दो महिला प्रत्याशी ही नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करेंगी.ठाकुरगंज,बहादुरगंज विधानसभा से किसी महिला को यह मौका अब तक नहीं मिला है.चुनाव के मुख्य प्रतिद्वन्द्वी घटक और गठबन्धनों ने एक तरह से महिलाओं से किनारा कर लिया है. आश्चर्य की बात यह कि जिले में महिलाओं को उम्मीदवार बनाने में हमेशा से पार्टियां कन्नी काट जाती है. या फिर हो सकता है कि महिला उम्मीदवार अपनी दावेदारी नहीं प्रस्तुत की है.*छह दशक पूर्व जीत चुकी है महिला उम्मीदवार*
विधानसभा चुनाव में भले ही महिला प्रत्याशियों की भागीदारी नहीं के बराबर है.लेकिन,अतीत के आईनें में देखें तो किशनगंज सदर सीट पर साठ के दशक में वर्ष 1967 में सुशीला कपूर ने प्रज्ञा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज कर नारी शक्ति का एहसास करा चुकीं हैं लेकिन बीते 58 सालों में फिर से कोई महिला विधायक नहीं बन सकी. क्योंकि आधी आबादी को हमेशा विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में अलग-थलग रखा गया है.और वर्तमान में देखें तो जिले के सभी सातों प्रखंडों में वार्ड सदस्या, समिति, मुखिया, प्रमुख, जिला पार्षद और जिला परिषद के अध्यक्ष तक कि कुर्सी तक महिलाएं पहुंची है.लेकिन जब चुनाव देश और प्रदेश की होती है तब आधी आबादी को टिकट से दर किनार कर दिया जाता है...तो क्या राजनीति से होने लगा महिलाओं का मोहभंग
जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में केवल दो महिला उम्मीदवारों की भागीदारी इस बार के चुनाव और प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है. प्रश्न उठ रहा है कि क्या राजनीति से महिलाओं का मोहभंग होने लगा है या फिर उनकी उपेक्षा की जा रही है. सोचने वाली बात है कि आखिर क्या वजह है कि भाजपा को छोड़ किसी भी राजनीतिक दल ने महिला प्रत्याशियों पर विश्वास नहीं जताया है. जबकि जिले के आबादी में महिलाएं पुरुषों की तुलना में मात्र कुछ प्रतिशत कम है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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