किशनगंज में रेतुआ नदी का कहर, देवरी गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
नदी कटाव | Prabhat Khabar Network
किशनगंज के देवरी गांव में रेतुआ नदी का कटाव विकराल रूप ले रहा है, जिससे ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है. नदी की धारा घरों और खेतों की ओर बढ़ रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है. ग्रामीण तत्काल प्रशासन से सुरक्षात्मक कार्य कराने की गुहार लगा रहे हैं.
Kishanganj News: किशनगंज. टेढ़ागाछ प्रखंड के चिल्हनियां पंचायत स्थित आदिवासी टोला देवरी गांव में इन दिनों रेतुआ नदी का कटाव ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बन गया है. नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही कटाव की रफ्तार अचानक बढ़ गई है और अब लोगों को डर सताने लगा है कि कहीं नदी की धारा धीरे-धीरे उनके घरों और खेतों तक न पहुंच जाए. गांव के किनारे लगातार मिट्टी नदी में समा रही है और हर दिन नदी का किनारा थोड़ा और कमजोर होता जा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक कटाव नदी किनारे की जमीन तक सीमित है, लेकिन यदि समय रहते सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में कई परिवारों के घर, कृषि भूमि और गांव के संपर्क मार्ग भी खतरे में आ सकते हैं. सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और यदि नदी का जलस्तर फिर बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
जलस्तर घटते ही क्यों बढ़ गया कटाव
टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या 14 स्थित आदिवासी टोला देवरी गांव के समीप रेतुआ नदी के किनारे लगातार मिट्टी का कटाव हो रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार नदी की धारा किनारे की मिट्टी को तेजी से काट रही है, जिससे नदी के किनारे स्थित जमीन असुरक्षित होती जा रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार कई नदियों में जलस्तर घटने के बाद भी किनारों पर कटाव तेज हो जाता है, क्योंकि तेज बहाव के दौरान कमजोर हुई मिट्टी धीरे-धीरे धंसने लगती है. यही स्थिति फिलहाल देवरी गांव के आसपास दिखाई दे रही है.
ग्रामीणों में बढ़ा भय, खेत और रास्ते भी खतरे में
आदिवासी टोला देवरी के लोगों का कहना है कि कटाव की वर्तमान स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में नदी गांव की ओर बढ़ सकती है. इससे न केवल मकानों को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि खेती योग्य भूमि भी प्रभावित होगी.
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए कृषि ही आजीविका का प्रमुख साधन है. यदि खेत नदी में समा गए तो परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ेगा. इसके अलावा गांव के आवागमन मार्ग पर भी खतरा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है.
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीण हरि यादव, सूरज राम, दीवान टुडू, नारायण राम, लाल बहादुर सिंह, सुनील सोरेन, विजय सोरेन, सोम सोरेन, तालु मुर्मू, सुरेंद्र यादव सहित अन्य लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से स्थल का निरीक्षण कर तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी नवीन कुमार से भी हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा है कि रेतुआ नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र में शीघ्र सुरक्षात्मक कार्य कराया जाए, ताकि बड़ी क्षति को समय रहते रोका जा सके.
Kishanganj News: कटावरोधी कार्य नहीं हुआ तो बढ़ सकता है संकट
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी किनारे बांस पाइलिंग, बोल्डर पिचिंग या अन्य प्रभावी तकनीकों का उपयोग कर कटाव को नियंत्रित किया जा सकता है. उनका मानना है कि यदि अभी काम शुरू हो जाए तो गांव और कृषि भूमि दोनों को बचाया जा सकता है.
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में इस क्षेत्र में कटाव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए. ऐसे में इस बार प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ही लोगों को राहत दे सकती है.
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लेखक के बारे में
By गौरव कुमार
गौरव कुमार प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है.
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