भारत की नई नीति से नेपाल के चाय उद्योग में हड़कंप, गोदामों में कैद हुई 12 लाख किलो चाय

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चाय बागान

Indo Nepal Tea Trade: भारतीय चाय बोर्ड द्वारा सीमा पर लागू की गई नई गुणवत्ता जांच प्रक्रिया (SOP) के कारण भारत-नेपाल के बीच होने वाला दशकों पुराना चाय व्यापार गहरे संकट में घिर गया है. निर्यात ठप होने से नेपाल के इलाम और झापा सहित विभिन्न क्षेत्रों के गोदामों में 12 लाख किलोग्राम से अधिक तैयार चाय डंप हो गई है, जिससे हजारों किसानों और श्रमिकों की आजीविका दांव पर लग गई है.

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गलगलिया (किशनगंज) से विवेक चौधरी की रिपोर्ट

Indo Nepal Tea Trade: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित किशनगंज जिले के गलगलिया प्रक्षेत्र सहित सीमांचल और उत्तर बंगाल की चाय कड़ियों में इन दिनों जबरदस्त व्यापारिक हड़कंप मचा हुआ है. भारतीय चाय बोर्ड द्वारा सीमावर्ती पानीटंकी और गलगलिया कस्टम पॉइंट पर लागू की गई नई कड़क मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) ने नेपाली चाय के भारतीय बाजारों में प्रवेश पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है. गुणवत्ता जांच की इस नई तकनीकी विसंगति और जटिल प्रक्रिया के कारण नेपाल के प्रमुख ऑर्थोडॉक्स और सीटीसी चाय उत्पादक प्रक्षेत्रों जैसे इलाम, कन्याम, फिक्कल, सूर्योदय, पाथीभारा और झापा के चाय बागानों व फैक्ट्रियों के सामने अस्तित्व का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. स्थिति यह है कि बिक्री ठप होने से करोड़ों रुपये की तैयार चाय गोदामों में सड़ने की कगार पर पहुंच गई है.

गोदामों में कैद हुई करोड़ों की पूंजी; देखें डंप माल के आंकड़े

  • भारतीय गोदामों में फंसा माल: नई नीति के तहत जांच रिपोर्ट आने में हो रही महीनों की देरी के कारण भारतीय सीमा के भीतर विभिन्न कस्टम वेयरहाउस और गोदामों में करीब 2 लाख किलोग्राम से अधिक तैयार चाय अटकी पड़ी है.
  • नेपाल की फैक्ट्रियों में हाहाकार: इधर निर्यात का रास्ता बंद होने के बावजूद बागानों में उत्पादन जारी रहने से नेपाल के उद्योगों में लगभग 10 लाख किलोग्राम से अधिक तैयार चाय का भारी भंडार जमा हो चुका है. बाजार में बिक्री न होने से चाय कप्तानों (उद्योगपतियों) की पूरी कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) ब्लॉक हो गई है.

SOTPAN ने दोनों सरकारों से लगाई गुहार; फैक्ट्रियों पर बंदी का ताला

प्रेस विज्ञप्ति

“भारतीय चाय बोर्ड द्वारा लागू नई लैब टेस्टिंग प्रक्रिया के कारण क्लियरेंस रिपोर्ट मिलने में कई-कई महीने का समय लग रहा है. इस अव्यावहारिक नीति के कारण चाय की शेल्फ-लाइफ और खुशबू प्रभावित हो रही है. यदि दोनों देशों की सरकारों ने राजनयिक कमान संभालकर इसका तात्कालिक और व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला, तो नेपाल की अधिकांश ऑर्थोडॉक्स फैक्ट्रियां अनिश्चितकाल के लिए बंद होने को मजबूर हो जाएंगी.” — सूर्योदय ऑर्थोडॉक्स टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (SOTPAN)

किसानों और कली-मजदूरों के चूल्हे ठप होने की आशंका; सीमावर्ती अर्थव्यवस्था जमींदोज

चाय उद्योग में आई इस ऐतिहासिक मंदी का सीधा और सबसे क्रूर प्रहार ग्रामीण प्रक्षेत्र के किसानों और बागान श्रमिकों पर पड़ रहा है. फैक्ट्रियों द्वारा हरी पत्तियों (ग्रीन लीव्स) की खरीद में 50% से अधिक की कटौती कर दिए जाने के कारण सीमावर्ती इलाकों के छोटे किसानों की मेहनत की फसल खेतों में ही बर्बाद हो रही है. इसके अतिरिक्त, नगद भुगतान न मिलने से कनिष्ठ व वरिष्ठ श्रमिकों को दैनिक राशन के लिए भी फजीहत झेलनी पड़ रही है.

व्यापारिक विश्लेषकों के अनुसार, इस संकट का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के काकरभिट्टा, पानीटंकी और गलगलिया जैसे मुख्य सीमावर्ती व्यापारिक केंद्रों की लॉजिस्टिक कड़ियों पर भी पड़ेगा. चाय के परिवहन, पैकेजिंग, लोडिंग-अनलोडिंग से जुड़े हजारों कली-मजदूरों और ट्रक ऑपरेटरों का रोजगार पूरी तरह ठप होने की कगार पर है. फिलहाल पूरा सीमांचल और नेपाल का चाय प्रक्षेत्र नई दिल्ली और काठमांडू के बीच होने वाले उच्च स्तरीय संवाद और किसी बड़ी राहत संबल की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठा है.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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