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टीबी से डरें नहीं कराएं जांच व उपचार: डीएम

Updated at : 08 Oct 2025 6:48 PM (IST)
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टीबी से डरें नहीं कराएं जांच व उपचार: डीएम

अब जिले के सभी प्रखंडों में उपलब्ध ट्रूनेट मशीन, मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा बाहर जांच के लिए

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– अब जिले के सभी प्रखंडों में उपलब्ध ट्रूनेट मशीन, मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा बाहर जांच के लिए– सिविल सर्जन और जिलाधिकारी ने बताया – समय पर जांच ही टीबी उन्मूलन का किशनगंज

देश को टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य 2025 तक तय किया गया है. इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है, क्योंकि टीबी एक ऐसी संक्रामक बीमारी है जो समय पर जांच और उपचार से पूरी तरह ठीक हो सकती है. बेलवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीबी सस्पेक्ट मरीजों के बलगम जांच हेतु ट्रूनेट मशीन की सुविधा शुरू की है.

अब किशनगंज प्रखंड में भी जांच की सुविधा शुरू

कार्यक्रम के दौरान सीडीओ सह जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम, स्वास्थ्य प्रबंधक नंद किशोर राजा और रत्नेश कुमार मौजूद थे.अब तक किशनगंज जिले के सभी प्रखंडों में ट्रूनेट मशीन की सुविधा थी, केवल किशनगंज प्रखंड में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी. बुधवार को इसके शुभारंभ के साथ अब पूरे जिले में यह जांच तकनीक सुलभ हो गई है. इससे मरीजों को सदर अस्पताल किशनगंज तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्थानीय स्तर पर ही रिपोर्ट उपलब्ध होगी.

स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी राहत

डॉ. मंजर आलम ने कहा कि जिले के सभी प्रखंडों में ट्रूनेट मशीन सक्रिय हो चुकी है. यह मशीन टीबी की पहचान को तेज और सटीक बनाती है. इसका लाभ अब हर संदिग्ध मरीज को अपने ही क्षेत्र में मिलेगा. टीबी जांच के लिए जिले में अब कई स्तरों पर सुविधाएं हैं. सदर अस्पताल किशनगंज में सीबीनेट मशीन पहले से संचालित है, वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज में भी उन्नत जांच सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावा, मरीज अपना स्पूतम (बलगम नमूना) नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में जमा कर सकते हैं, जहां से उसे जांच केंद्र तक भेजा जाता है. इससे ग्रामीण मरीजों को यात्रा की परेशानी और जांच में देरी दोनों से राहत मिलेगी.

जिले में जनवरी से सितंबर तक 1735 टीबी मरीजों की पहचान

जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 1735 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिनमें 38 एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) केस शामिल हैं. वर्तमान में 1109 मरीज टीबी उपचाराधीन हैं, जबकि 16 एमडीआर मरीजों का इलाज चल रहा है. 426 मरीज पूरी तरह ठीक होकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, और 254 मरीजों को बाहर रेफर किया गया है. टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मरीजों को पोषण सहायता के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) सुविधा दी जा रही है. अब तक 1456 मरीजों को सहायता राशि का भुगतान किया जा चुका है. डॉ मंजर आलम ने कहा कि हर मरीज को समय पर दवा और पोषण सहायता देना हमारी प्राथमिकता है.

निजी चिकित्सकों को मिला नोटिफिकेशन इंसेंटिव

टीबी उन्मूलन अभियान में निजी डॉक्टरों की भूमिका को सराहते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन चिकित्सक डॉ. शिव कुमार, डॉ. आसिफ रेज़ा और डॉ. तनवीर अहमद को 1.53 लाख रुपये का प्रोत्साहन भुगतान किया है. सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि अब जिले के सभी प्रखंडों में टीबी जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं.

डीएम विशाल राज ने कहा कि टीबी से डरने की नहीं, जांच कराने की जरूरत है. लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराना ही सबसे बड़ा बचाव है. यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है, बशर्ते मरीज नियमित दवा लें और परामर्श का पालन करें. किशनगंज को टीबी मुक्त बनाना हमारा साझा संकल्प है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ताओं, निजी चिकित्सकों और सामुदायिक संस्थाओं के सहयोग से जिले में घर-घर सर्वे, दवा वितरण और जागरूकता अभियान लगातार चल रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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