सोच है, पर शौचालय नहीं, जानें झाड़खोड़ा हल्दीबाड़ी गांव की कहानी...

पहाड़कट्टा : बिहार के किशनगंज जिले के पहाड़कट्टा प्रखंड के सारोगोड़ पंचायत के वार्ड नंबर दो का आदिवासी टोली झाड़खोदा हल्दीबाड़ी कभी आजादी के दीवानों के सुर में सुर मिलाकर साथ निभाता था, मगर आज देश को आजाद होने के करीब 70 साल बाद भी यह टोला बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. हालांकि, केंद्र सरकार […]
पहाड़कट्टा : बिहार के किशनगंज जिले के पहाड़कट्टा प्रखंड के सारोगोड़ पंचायत के वार्ड नंबर दो का आदिवासी टोली झाड़खोदा हल्दीबाड़ी कभी आजादी के दीवानों के सुर में सुर मिलाकर साथ निभाता था, मगर आज देश को आजाद होने के करीब 70 साल बाद भी यह टोला बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. हालांकि, केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से अनुसूचित जाति एवं जनजातियों की उत्थान के लिए अनेकानेक कल्याणकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके बावजूद यहां के लोगों के पास रहने के लिए न तो ढंग का आशियाना हैऔर न ही शुद्ध पेयजल समेत शौचालय की ही व्यवस्था है.
इस टोले के निवासी मनुराम मरांडी कहते हैं कि ग्रामीणों को आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, शुद्ध पेयजल सहित शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मयस्सर नहीं है. आज भी यहां की महिलाएं शौचालय के अभाव में खुले में शौच करने को मजबूर हैं. इसके साथ ही उनके पास न रहने के लिए मकान है और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी ही मिल पाता है.
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