एंबुलेंस सेवा लचर होने से गर्भवती महिलाओं को परेशानी

Published at :21 Nov 2017 6:39 AM (IST)
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एंबुलेंस सेवा लचर होने से गर्भवती महिलाओं को परेशानी

पौआखाली : जिले के कई सरकारी अस्पतालों में राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा, संबंधित एजेंसी की मनमानी के चलते खुद ही बीमार है. जिस कारण पिछले कई दिनों से मरीजों को एम्बुलेंस सेवा नहीं मिल पा रही है और मरीज अस्पताल से बैरंग वापस लौटने को मजबूर हैं. एम्बुलेंस कर्मी ईएमटी मनोज कुमार, राजीव कुमार राम, चालक […]

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पौआखाली : जिले के कई सरकारी अस्पतालों में राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा, संबंधित एजेंसी की मनमानी के चलते खुद ही बीमार है. जिस कारण पिछले कई दिनों से मरीजों को एम्बुलेंस सेवा नहीं मिल पा रही है और मरीज अस्पताल से बैरंग वापस लौटने को मजबूर हैं. एम्बुलेंस कर्मी ईएमटी मनोज कुमार, राजीव कुमार राम, चालक ललन कुमार भारती व नवीन कुमार मंडल ने जो जानकारी प्रदान की है वह स्वास्थ्य विभाग तथा कार्य एजेंसी पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.

दरअसल इन कर्मियों के मुताबिक राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा के तहत प्रदान किए गये एम्बुलेंस के रख रखाव एवं कर्मियों के मानदेय का जिम्मा 15 अक्टूबर 2017 से जिला स्वास्थ्य समिति ने निजी एनजीओ पशुपति देवनाथ सामान फाउंडेशन के हाथों सौंप दिया है. जिसे प्रति माह एक एम्बुलेंस के रख रखाव पर खर्च आदि के लिए उचित राशि प्रदान की गई है बावजूद 17 नवंबर 2017 से क्षतिग्रस्त टायरों व क्षतिग्रस्त पिछले दरवाजे के कारण पौआखाली पीएचसी परिसर में खड़ी एम्बुलेंस को संबंधित एनजीओ,

सूचना मिलने के बाद भी ठीक कराने की दिशा में कोई पहल नहीं कर रही है जिस कारण तब से लेकर आजतक इमरजेंसी मरीजों को पौआखाली पीएचसी में एक मात्र सरकारी एम्बुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल पाने से काफी दिक्कत होने लगी है़ खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही एंबुलेंस सेवा ठप होने से गर्भवती महिला को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. एम्बुलेंस कर्मियों ने बताया कि सिर्फ पौआखाली पीएचसी ही नहीं अपितु कोचाधामन एवं दिघलबैंक के अलावे सदर अस्पताल के एम्बुलेंस खराब स्थिति के चलते कहीं गैरेज में पड़ा हुआ है या तो फिर पीएचसी परिसर में खड़े खड़े शोभा की वस्तु बनकर मरीजों का मुंह चिढ़ा रही है. एम्बुलेंस कर्मियों के मुताबिक 19 अक्टूबर को सभी प्रखंड के एम्बुलेंस कर्मियों की बैठक की गई जिसमें सर्वसम्मति से एनजीओ की मनमानी के विरोध में शिकायत दर्ज कराने का भी निर्णय लिया गया है . कारण यह बताया जाता है कि एनजीओ में एसीओ के पद पर कार्यरत धीरज कुमार को खराब पड़े एम्बुलेंस के रिपियेरिंग के लिए बार बार अनुरोध किया जा रहा है मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है. एम्बुलेंस कर्मियों ने बताया है कि इनसे पूर्व भी एक एनजीओ के द्वारा राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा का संचालन किया जा रहा था जो हमारे नौ माह के मानदेय की राशि को ही डकार लिए थे . पुनः एनजीओ के हवाले किए जाने से एक बार फिर एम्बुलेंस सेवा को सुचारू रूप से बहाल रख पाना आसान नही हो पा रहा है इनसे बेहतर तो पिछले तीन वर्षों तक जिला स्वास्थ्य समिति के अंडर ही इसका संचालन हो रहा था जहाँ किसी तरह की परेशानियों से हम एम्बुलेंस कर्मियों को नही गुजरना पड़ता था.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉक्टर पशुपति ने सर्वप्रथम इस बाबत बताया कि जिले में नये एम्बुलेंस की आपूर्ति जल्द होने वाली है. तब यह समस्या दूर हो जायेगी.
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