पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है छठ का महाव्रत

दिघलबैंक : साक्षात प्रकृति के आराधना का चार दिवसीय अनुष्ठान छठ पूजा की शुरुआत आज मंगलवार को नहाय-खाय के साथ ही प्रारंभ हो जायेगा. जिसको लेकर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में है. कार्तिक माह में मनाये जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ का हिन्दू धर्म में एक विशेष और अलग स्थान है,कहा जाता […]
दिघलबैंक : साक्षात प्रकृति के आराधना का चार दिवसीय अनुष्ठान छठ पूजा की शुरुआत आज मंगलवार को नहाय-खाय के साथ ही प्रारंभ हो जायेगा. जिसको लेकर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में है. कार्तिक माह में मनाये जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ का हिन्दू धर्म में एक विशेष और अलग स्थान है,कहा जाता है कि इस पर्व में प्रकृति की साक्षात पूजा होती है. शुद्धता एवं पवित्रता इस पर्व का मुख्य अंग है, प्रकृति के अवयवों में से एक जल स्रोतों के निकट छठ पूजा का आयोजन होता है
. व्रती द्वारा पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिए जाते हैं. इसी क्रम में उल्लेखनीय है कि संभवतः ये अपने आप में ऐसा पहला पर्व है जिसमें कि डूबते और उगते दोनों ही सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है . उनकी वंदना की जाती है. सांझ-सुबह की इन दोनों अर्घ्य के पीछे हमारे समाज में एक आस्था का काम करती है. वो आस्था ये है कि सूर्यदेव की दो पत्नियां हैं- ऊषा और प्रत्युषा . सूर्य के भोर की किरण ऊषा होती है और सांझ की प्रत्युषा .
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