पढ़ाई के समय दहशत में रहते हैं बच्चे

Published at :11 Oct 2017 4:44 AM (IST)
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पढ़ाई के समय दहशत में रहते हैं बच्चे

उदासीनता. हादसे को आमंत्रण दे रहा उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाड़ीभिट्ठा का जर्जर भवन हाड़ीभिट्टा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय का जर्जर भवन दयनीय िस्तथि में है, जो कभी भी िगर सकता है. दिघलबैंक : प्रखंड के सतकौआ पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाड़ीभिट्टा के बच्चों के लिए स्कूल परिसर में वर्षों से खड़ा जर्जर भवन इस […]

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उदासीनता. हादसे को आमंत्रण दे रहा उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाड़ीभिट्ठा का जर्जर भवन

हाड़ीभिट्टा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय का जर्जर भवन दयनीय िस्तथि में है, जो कभी भी िगर सकता है.
दिघलबैंक : प्रखंड के सतकौआ पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाड़ीभिट्टा के बच्चों के लिए स्कूल परिसर में वर्षों से खड़ा जर्जर भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि कभी भी गिर सकता है़ कई माह पूर्व जर्जर भवन के बरामदा का छत अचानक गिर गया, हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. बाकी बचे छत से प्लास्टर बीच-बीच में टूटकर गिरते रहता है. छत से छड़ बाहर आ चुका है और दीवार भी पूरी तरह खोखली हो चुकी है़
विद्यालय के प्रधान शिक्षक महेंद्र कुमार दास ने बताया कि विद्यालय के शुरुआती समय में ही भवन निर्माण कराया गया था जो अब पुराना और जर्जर हो चुका है़ अब स्थिति यह हो गयी है कि यह भवन कभी भी गिर सकता है़ जिसकी चपेट में स्कूल के कई मासूम बच्चे आ सकते है. बार-बार सूचना देने के बाद भी विभाग और संबंधित पदाधिकारी इसके प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहे है.
स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि लंच और छुट्टी के समय कई बच्चे खेलते हुए उस जर्जर भवन में चले जाते हैं. समझाने या डांटने पर बड़े बच्चे तो वहां नहीं जाते हैं, लेकिन छोटे-छोटे बच्चे खेलने के क्रम में उस भवन में चले जाते हैं जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते है़ इस संबंध में स्कूल की ओर से भवन को तोड़ने के लिए संबंधित विभाग को लिखित आवेदन भी दिया गया है. विभाग द्वारा जर्जर भवन का निरीक्षण भी किया गया था़ लोगों को लगा कि अब इस जर्जर भवन को तोड़ने का आदेश दे दिया जाएगा़ मगर वर्षों बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गयी. इससे शिक्षक, बच्चे और अभिभावक काफी डरे और चिंतित रहते है.
पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि मो नजरुल ने बताया कि इस जर्जर भवन के बरामदे का छत कुछ महीने पहले ही टूट कर गिर गया़ अगर उस समय विद्यालय में बच्चे रहते तो एक बड़ी घटना घट सकती थी़ बचे हुए छत से भी प्लास्टर का टुकड़ा गिरते रहता हैं. अगर इस जर्जर भवन को तोड़ दिया जाये तो बच्चों को खेलने के लिये जगह भी बढ़ जाएगी़ विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए़
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