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नीरपुर में माता जगदंबा विल्वेश्वरी की गई पूजा अर्चना, पीपल पेड़ में समाहित हैं उनकी महिमा

Updated at : 29 Oct 2025 10:00 PM (IST)
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नीरपुर में माता जगदंबा विल्वेश्वरी की गई पूजा अर्चना, पीपल पेड़ में समाहित हैं उनकी महिमा

सबकी मुरादें पूर्ण करती हैं मां जगदंबा विल्वेश्वरी

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– सबकी मुरादें पूर्ण करती हैं मां जगदंबा विल्वेश्वरी -सदियों से कार्तिक मास की अष्टमी को होती आ रही हैं विशेष पूजन का आयोजन -मंदिर निर्माण के लिए मां नहीं देती हैं इजाजतचौथम. प्रखंड क्षेत्र के नीरपुर पंचायत के वार्ड संख्या एक नीरपुर गांव स्थित माता जगदंबा विल्वेश्वरी की महिमा पीपल पेड़ में समाहित है. माता जगदंबा अपने भक्तो को मंदिर निर्माण का इजाजत नहीं देती है. माता सबकी मुरादें पूर्ण करती है. सदियों से छठ पूजा के बाद अष्टमी के दिन विशेष पूजन का आयोजन किया जा रहा है. बुधवार को विशेष पूजन में आधा दर्जन से अधिक पंडितों ने भाग लेकर दुर्गा सप्तशती पाठ, जाप, हवन किया. महिलाओं ने रामायण पाठ की. उसके बाद कुंवारी कन्या को भोजन करवाया गया. माता के आशीर्वाद से दर्जनों लोग नौकरी प्राप्त कर चुके है. माता जगदंबा की महिमा अगम अपार है.

माता जगदंबा विल्वेश्वरी स्थान का इतिहास

नीरपुर निवासी किशोर पाठक, चंदन पाठक, मदन पाठक, शशि कांत पाठक, नवीन पाठक, रंजन पाठक, पवन पाठक, पंकज पाठक, संजीव पाठक, शोभाकांत पाठक आदि बताते हैं कि हमारे पूर्वज माता जगदंबा ने स्वप्न दिया कि नीरपुर स्थित कोसी की धार में एक बेल का वृक्ष है. वहां जाकर मेरी अराधना करो. लाल पाठक काफी अनपढ़ थे. माता की असीम कृपा के साथ बेल वृक्ष में माथा टेकते ही उन्हें अद्भूत ज्ञान की प्राप्ति होने लगा. माता की सेवा में अपने आप को समर्पित कर दिया. यहां तक ही नहीं इलाके के विद्वान पंडित के रूप में मशहूर हो गये. उनका परिवार नीरपुर गांव में आकर बस गया. जो आज उनके वंशज एक बड़ा परिवार के रूप में मौजूद हैं. माता जगदंबा विल्वेश्वरी की आराधना करते आ रहे हैं. बताया जाता है कि इलाके के एक संत ने बेल के पेड़ पर ही समाधी ले लिया था. कुछ दिनों के बाद बिना माता के आदेश से विशाल बेल के पेड को किसी के हाथों बेच दिया गया. बेचने वाले एवं लेने वाले के साथ कटाई करने वाले के साथ आकस्मिक घटना घटी. बेल पेड़ के जगह रातों रात पीपल का पेड़ उग गया. पुन: पूजा अर्चना होने लगा. 2002 में अचानक कोसी की बाढ़ में पीपल का पेड़ गिर पड़ा था. विशेष पूजन के साथ माता के आदेश से पीपल पेड़ की कटाई किया गया. एक चबूतरे का निर्माण किया गया. लेकिन इस दौरान पुन: पीपल का पेड़ उग गया. आज उसी पीपल के पेड के नीचे माता जगदंबा विल्वेश्वरी की अराधना भक्त करते आ रहे है.

मंदिर निर्माण के लिए नही मिलता है आदेश

ग्रामीण बताते है कि सदियों से खुले आसमान के नीचे पहले बेल ओर अब पीपल पेड़ के नीचे माता जगदंबा विल्वेश्वरी की अराधना भक्तजन करते आ रहे हैं. कई बार लोगो ने विशेष पूजा अर्चना के साथ मंदिर निर्माण के लिए माता जगदंबा विल्वेश्वरी से आदेश लेना चाहा. लेकिन सफलता नहीं मिली. इलाके के लोग सच्चे मन से जो भी माता के दरबार में आते है. सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. मौके पर मुखिया प्रिंस कुमार, पूर्व सरपंच साहेब सिंह, समिति सदस्य मुरारी सिंह, छोटू, मोनू, शुकुल शिखा, डब्लू पाठक, राजीव पाठक, दिलखुश पाठक, रूपेश पाठक, दिलीप पाठक, मुकुल, रिषू, मिंटू, राहूल, रजनीकांत पाठक, अवधेश पाठक, गुलशन पाठक, शुभम पाठक, राजा पाठक, मनखुश पाठक, सोनू पाठक, वकील सिंह, गोबिंद सिंह, फूलों सिंह, नीशू कुमारी आदि मौजूद थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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