अपराध से बंदी करेंगे तौबा, जेल से निकलने पर करेंगे बकरी पालन

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अपराध से बंदी करेंगे तौबा, जेल से निकलने पर करेंगे बकरी पालन

जीविकोपार्जन के लिए बनाया जा रहा बंदियों को आत्मनिर्भर, शुरू हुआ प्रशिक्षण

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जीविकोपार्जन के लिए बनाया जा रहा बंदियों को आत्मनिर्भर, शुरू हुआ प्रशिक्षणखगड़िया. मंडल कारा खगड़िया में बंद बंदी यहां से बाहर निकलने पर बकरी पालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करेंगे. बता दें कि कारा में बंद कैदियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. ताकि यहां से बाहर निकलने के बाद वे गलत काम करने की जगह खुद का रोजगार कर सके. रुढ़ सेठी द्वारा कारा में बंद करीब 35 बंदियो को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इन बंदियो को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि जीविकोपार्जन के लिए न तो दोबारा गलत काम करना पड़े या फिर किसी के सामने इन्हें न हाथ फैलाना पड़े और न रोजगार मांगने जाना पड़े. जानकारी के मुताबिक एक बैच में 35 बंदियों को बकरी की ट्रेनिंग दी जा रही है. पहले भी इस तरह की ट्रेनिंग का आयोजन यहां हाेते रहे हैं. बताया गया कि आगे भी यहां के बंदियों को ट्रेनिंग देने की योजना है.

10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ

खगड़िया कारा में गुरुवार को 10 दिवसीय बकरी पालन का प्रशिक्षण आरंभ किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन कारा अधीक्षक धर्मेन्द्र कुमार व रुढ़ सेठी के निदेशक प्रकाश कुमार ने संयुक्त रूप से किया. इन 10 दिनों में बंदियों को बकरी पालन के पहले जागरूक किया जाएगा, फिर उन्हें बकरी पालन के तरीके सिखाए जाएंगे. प्रशिक्षण के दौरान इन्हें बकरी के प्राथमिक उपचार के भी गुर सिखाए जाएंगे. बता दें प्रशिक्षण के उपरान्त सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र भी दिये जाएंगे. इस दौरान फेकेल्टी अमित कुमार, सहायक पंकज कुमार उपस्थित थे.

आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिये जा रहे हैं प्रशिक्षण – अधीक्षक

छोटे-मोटे अपराधों में यहां आने वाले बंदियों की संख्या अच्छी-खासी है जो कुछ दिनों में यहां से छुटेंगे. घर लौटने के ये फिर से मार-पीट, लड़ाई-झगड़े सहित अन्य घटनाओं का अंजाम न दें, इसके लिए इन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है. कुछ माह में यहां से बाहर जाने वाले बंदियों को डेयरी व मुर्गी पालन की ट्रेनिंग दी जा रही/जाएगी. यहां से छूटने के बाद ये लोग बकरी पालन कर अपनी जीविका चलाएंगे. आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है. इस बैच में 35 बंदियों की ट्रेनिंग आंरभ की गई है.

धर्मेन्द्र कुमार, कारा अधीक्षक

रोजगार के लिए मिलेगा ऋण- निदेशक

ट्रेनिंग के व कारा से निकले के पश्चात अगर बंदी चाहें तो बकरी पालन के ऋण भी प्राप्त कर सकते हैं. उनकी यह कोशिश होगी कि बकरी खरीदने में असमर्थ रहे ऐसे लोगों को आसानी से बैंकों द्वारा ऋण मुहैया कराया जा सके. अगर राशि के अभाव में ये रोजगार नहीं पाए तो फिर से ये अपराध की दुनियां में कदम रख देंगे. ऐसे में इन्हें ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य पर ही पानी फिर जाएगा.

प्रकाश कुमार, निदेशक आर सेठी.

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