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अनुमंडलीय अस्पताल में मांगने पर भी नहीं मिला बेड व स्लाइन स्टैंड

Updated at : 30 Oct 2025 10:40 PM (IST)
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अनुमंडलीय अस्पताल में मांगने पर भी नहीं मिला बेड व स्लाइन स्टैंड

रोगी को स्लाइन चढ़ाने के लिए परिजन ने हाथ में घंटों थामे रखा बोतल

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रोगी को स्लाइन चढ़ाने के लिए परिजन ने हाथ में घंटों थामे रखा बोतल रणवीर झा. गोगरी. जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक शर्मनाक मामला सामने आया है. अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी में मरीज के परिजन को स्वयं स्लाइन की बोतल पकड़े रखने की मजबूरी का एक फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हालांकि प्रभात खबर वायरल वीडियो का पुष्टि नहीं करता. यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर करती है, बल्कि मानवीय संवेदना के अभाव को भी दर्शाती है. हाथों में मरीज की जान है. इसमें थोड़ी-सी गड़बड़ी से रोगी की जान पर बन सकती है. मिली जानकारी के अनुसार रोगी को पानी चढ़ाने के लिए रोगी के परिजन ने हाथ ही घंटों बोतल पकड़े रखा और परिजन ने बताया कि मांगने पर भी बेड और स्लाइन स्टैंड नहीं मिला. मजबूरी में हाथ में ही बोतल को लेकर खड़ा रहना पड़ा. मायागंज किया गया था रेफर बता दें की महेशखूंट के बड़ी मदारपुर निवासी संजीत कुमार नामक एक युवक की तबीयत अचानक बुधवार की देर रात्रि में खराब हो गयी, जिसको परिजन ने आनन-फानन में गोगरी के अनुमंडलीय अस्पताल में लाया. जहां से चिकित्सक ने इमरजेंसी कक्ष में भर्ती करने के बजाय महज एक पानी का बोतल लगा दिया और भागलपुर मायागंज रेफर कर दिया. जिसके बाद परिजन मरीज को ले जाने के लिए एम्बुलेंस देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन अस्पताल में मरीज और परिजन को सुनने वाला कोई नहीं था थक हारकर परिजन अस्पताल के बाहर में मरीज को लेकर जमीन पर बैठ गया और हाथ में लगे स्लाइन की बोतल को पकड़कर घंटों बैठा रहा. मौके पर कुछ गार्ड भी थे लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं किया. बुधवार की देर रात्रि का बताया जा रहा मामला बता दें की विगत बुधवार की देर रात्रि में गोगरी अनुमंडल का जीवनरेखा माना जाने वाला अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी का बताया जा रहा है. फोटो में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि एक मरीज का परिजन अपने हाथ में स्लाइन की बोतल लिए बैठा हुआ है, जबकि मरीज जमीन पर लेटा हुआ है. जब फोटो लेने वाले व्यक्ति ने परिजन से पूछा कि स्लाइन खत्म होने पर कोई डॉक्टर देखने आया है या नहीं, तो परिजन का जवाब था-कोई डॉक्टर नहीं आया. डॉक्टर स्लाइन लगाकर चले गए हैं. भले ही सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर पानी की तरह पैसा बहा रही है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने नि:शुल्क एंबुलेंस चलाई जा रही है. वहीं, मरीजों के अस्पताल पहुंचने पर उन्हें ले जाने व्हील चेयर, स्ट्रेचर के साथ ही वार्ड बॉय भी तैनात किए गए हैं. लेकिन इन सबका गरीब मरीजों को कितना लाभ मिलता है यह बुधवार की देर रात्रि में गोगरी के अनुमंडलीय अस्पताल पहुंच एक घायल के परिजन की बेबसी देखकर समझ आ गया. कहते हैं प्रभारी घटना का संबंध में अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर चंद्रप्रकाश ने बताया कि वायरल फोटो के माध्यम से मामले का पता चला है. मामले की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. इसके लिए जो भी कर्मी दोषी होंगे उनपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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