जनवरी<bha>@</bha> 2026 का वेतन नहीं मिलने पर भासा से जुड़े चिकित्सकों में आक्रोष

Published by : RAJKISHORE SINGH Updated At : 18 Feb 2026 10:40 PM

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चिकित्सकों ने की सिविल सर्जन से वेतन जारी करने की मांग

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चिकित्सकों ने की सिविल सर्जन से वेतन जारी करने की मांग खगड़िया. जनवरी माह 2026 का वेतन नहीं दिए जाने के विरोध में बुधवार को स्थानीय बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ इकाई की बैठक सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में हुई. बैठक में भासा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार, जिला सचिव डॉ नरेंद्र कुमार, राज्य स्तरीय संयुक्त सचिव डॉ अभिषेक आनंद, प्रमंडलीय सचिव डॉ. राजीव रंजन, डॉ मनीष कुमार, डॉ. रेखा, डॉ संजीव, डॉ संजू, डॉ जयकांत, डॉ शशि, डॉ अभिषेक आनंद, डॉ हरिनंदन पासवान, डॉ. विनय, डॉ. रमन, डॉ. देवव्रत, डॉ. संतोष, डॉ. जैनब, डॉ. सोमी, डॉ. मुसर्रत, डॉ. उदय आदि चिकित्सक उपस्थित थे. बैठक में कहा गया कि जिला पदाधिकारी के मौखिक आदेश पर सिविल सर्जन द्वारा चिकित्सकों की उपस्थिति जियो-टैग के माध्यम से दर्ज करने के आदेश दिया गया था. जिसका चिकित्सकों ने पहले भी विरोध किया था. जिओ टैग उपस्थिति के कारण जनवरी माह का वेतन भुगतान नहीं किया गया है. जिस पर चिकित्सकों ने आक्रोश व्यक्त किया. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के स्थानीय इकाई से जुड़े पदाधिकारियों ने जिला पदाधिकारी एवं सिविल सर्जन से चिकित्सकों का जनवरी माह 2026 का वेतन भुगतान अविलंब की मांग की. बैठक में उपस्थित चिकित्सकों ने इस आदेश को व्यावहारिक कठिनाइयों से युक्त बताते हुए इसका विरोध किया. इस पर पुनर्विचार करने की मांग की. जिला में पूर्व से ही चिकित्सकों की संख्या बहुत कम है, उसके बावजूद भी सभी चिकित्सक मिलकर जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में अपना भरपूर सहयोग दे रहे हैं. एक ही चिकित्सक को ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी, पोस्टमार्टम एमएलसी, कोर्ट गवाही, वीआईपी मूवमेंट,मेला, ट्रेनिंग के साथ-साथ सभी नेशनल प्रोग्राम में काम करना पड़ता है. बैठक में औरंगाबाद सीएचसी में ड्यूटी पर कार्यरत एक चिकित्सक पर हुए हिंसात्मक हमले की घटना की कड़ी निंदा की. इस घटना से जिले के चिकित्सकों में आक्रोश है. संघ ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से मांग की कि चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी एवं ठोस व्यवस्था लागू की मांग की. संघ ने कहा कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में परिजन एवं भीड़ मरीज के साथ आ जाते हैं, जिससे आपातकालीन मरीजों के उपचार के दौरान भय एवं तनाव का वातावरण बन जाता है. हमेशा अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है. दुर्भाग्यवश चिकित्सकों की सुरक्षा के विषय में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है. संघ ने प्रशासन से आग्रह किया कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था तथा संवेदनशील स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष सुरक्षा बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि चिकित्सक निर्भय होकर अपनी सेवा दे सकें.

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