जिउतिया व्रत की तैयारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Sep 2016 5:59 AM (IST)
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खगडिया : भारतीय संस्कृति में अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी का विशेष महत्व है. घर घर में महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निराधार व्रत धारण करती हैं. संसारपुर निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर, पिपरा निवासी पंडित चन्द्रभुषण मिश्र,आदि बताते हैं कि तीन दिवसीय जिवित्पुत्रिका व्रत 22 सितंबर से प्रारम्भ हो जाएगी. 22 को दिन […]
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खगडिया : भारतीय संस्कृति में अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी का विशेष महत्व है. घर घर में महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निराधार व्रत धारण करती हैं. संसारपुर निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर, पिपरा निवासी पंडित चन्द्रभुषण मिश्र,आदि बताते हैं कि तीन दिवसीय जिवित्पुत्रिका व्रत 22 सितंबर से प्रारम्भ हो जाएगी.
22 को दिन में महिलाएं श्रद्धा पूर्वक नदी या सरोवर में स्नान करेंगे. जिसे आमतौर पर नहाय खाय कहा जाता है. एवं सुबह 4 बजे उटगन, यानी स्नान कर के व्रतधारी महिलाएं हल्का भोजन करेगी. उसके बाद 23 सितंबर को सुबह से अष्टमी व्रत प्रारंभ हो जाएगी. महिलाएं दिन रात निराधार व्रत रखेगी. और 24 सितंबर को पारण करेगी. जिवित्पुत्रिका व्रत तीन दिनों का अनुष्ठान हैं. जिवित्पुत्रिका व्रत धारण करने वाली महिलाएं ने बताया कि अखण्ड डाला में नारियल, खीरा,बांस के पत्ते, जियल के पत्ते,पान, सुपारी, जनेऊ,कई तरह के फल एवं पकवान भर कर लाल कपड़े में बांध दिया जाता हैं.
व्रतधारी महिलाएं जिवित्पुत्रिका व्रत की कथा श्रवण करती हैं. व्रत का पारण करने के पूर्व घर के संतान अखण्ड डाली पर रखे लाल रंग के कपड़े को हटाते हैं. इसके बाद ही व्रतधारी जिवित्पुत्रिका व्रत का पारण करती हैं. पारण में व्रतधारी भात, नोनी की सब्जी, साग एवं मडुवा की रोटी ग्रहण करती हैं. 23 को डाली भराई एवं 24 को खोला जाएगा.
पौराणिक कथा
भारतीय संस्कृति में पर्व त्यौहार का विशेष महत्व है. सभी पर्व पौराणिक कथा से जुड़ी हुई हैं. जिमुत वाहन राजा ने गरुड़ से मुक्ति दिलाकर कई मृत पुत्रों को जीवित करवाया था. द्रोपदी ने अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए जिवित्पुत्रिका व्रत रखा था. उसके बाद महिलाएं अपने संतान की दीर्घायु के अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को जिवित्पुत्रिका व्रत करती आ रही हैं. यह व्रत प्रत्येक घर में महिलाएं करती हैं.
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