50 साल पुराने पाइप से जलापूर्ति

परेशानी. आपूर्ति वाला पानी गंदगी के कारण पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शुद्ध पानी अब तक खगड़िया वासियों को नसीब नहीं हो पाया है. 1966 में बिछाये गये पाइप लाइन से पीएचइडी विभाग पानी सप्लाई कर रहा है. इस पानी का उपयोग पशु को नहलाने व […]
परेशानी. आपूर्ति वाला पानी गंदगी के कारण पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं
करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शुद्ध पानी अब तक खगड़िया वासियों को नसीब नहीं हो पाया है. 1966 में बिछाये गये पाइप लाइन से पीएचइडी विभाग पानी सप्लाई कर रहा है. इस पानी का उपयोग पशु को नहलाने व कपड़ा धोने में हो रहा है. मजबूरी में लोग दूषित पानी से प्यास भी बुझाते हैं.
खगड़िया : करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद खगड़िया वासियों को शुद्ध पानी पिलाने में पीएचइडी विभाग विफल रहा है. लिहाजा खगड़िया के लोग आयरन व आर्सेनिक युक्त पानी पीकर बीमार हो रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि जिले के 129 पंचायतों में आयरन युक्त पानी है. जो स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है.
ऐसे जगहों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चापाकल में लाल चिह्न लगा दिया गया है. उल्लेखनीय है कि पीएचइडी द्वारा जिले को आयरन मुक्त पानी उपलब्ध कराने में करोड़ों रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है. अगर चापाकल की बात करें तो हजारों की लागत से विद्यालय व चौक चौराहे पर आयरन रिमूवल प्लांट वाले चापाकल लगाये गये, कुछ दिनों तक तो लोगों को शुद्ध पानी नसीब हुआ, फिर स्थिति जस की तस हो गयी. अगर जलमीनार की बात करें तो कई जलमीनार का निर्माण किया गया, लेकिन आज तक लोगों के लिए शुद्ध पेयजल सपना बना हुआ है.
जल मीनार का पानी है बेकार: 1966 में बिछाया गया पाइप कई जगह फट चुका है.और गंदा पानी लोगों के घर तक पहुंच रहा है. शहर के जयप्रकाश नगर, एनएसी रोड, मालगोदाम रोड, एसडीओ रोड, थाना रोड, मीलरोड, मिरग्यासचक, मेनरोड, विद्याधार, बखरी बस स्टैंड, दाननगर , बलूवाही, स्टेशन रोड में जलमीनार के पाइप फट चुके हैं. इससे गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है. लोग इस गंदे पानी का उपयोग गाड़ी, बरतन या कपड़े धोने में करते हैं.
खगड़िया : अधिकतर क्षेत्रों चापाकल से निकलने वाले पानी में आर्सेनिक व आयरन की मात्रा अत्यधिक रहती है. इस कारण शहर में रहने वाले ज्यादातर लोग बोतल बंद पानी पर निर्भर है. इतना ही नहीं डिब्बा बंद पानी का कारोबार भी काफी फल-फूल रहा है. पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार कई योजनाएं चला रही है. ये योजनाएं धरातल पर सही ढंग से लागू नहीं होने से जिले में पेयजल की समस्या बनी हुई है.
1966 से अब तक नहीं बदला गया है पाइप: शहर के अधिकतर हिस्सों में वाटर सप्लाई के लिए पाइप लाइन वर्ष 1966 में बिछाया गया था. लगभग 50 वर्ष होने के बावजूद आज तक उक्त पाइप को बदला नहीं गया है. इस कारण कई जगह पाइप फट जाने के कारण लोगों को गंदा पानी मिल रहा है.
साल में एक बार जलमीनार की सफाई: पीएचइडी कार्यालय में बने जलमीनार की साफ सफाई साल में एक बार की जाती है. इस कारण पानी से बदबू आना लाजिमी है. लोग उक्त जलमीनार के पानी से वाहन धुलाई, कपड़ा धुलाई तथा बरतन आदि ही करते हैं.
शहर के कई हिस्सों में नहीं है वाटर सप्लाई: अस्पताल रोड, पोस्ट आॅफिस रोड आदि में कई महीनों से जलमीनार से वाटर सप्लाई नहीं हो रही है. शहर के विभिन्न मोहल्लों में रहने वाले मनीष कुमार, रमेश कुमार, रामदेव यादव, मोहन महतों आदि ने बताया कि हमलोग शहर में रहते हैं. शहर में लगने वाले सारे टैक्स भुगतान करते हैं, पर शहर में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. हमें सप्लाई वाटर भी नहीं मिलता है.
प्रतिमाह हजारों रुपये का पानी पी रहे खरीद कर: शहर के व्यवसायी शिव तुलस्यान, विनय कुमार, अरविंद कुमार, रणवीर कुमार आदि ने बताया कि शहर के लोगों को विभाग शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में असमर्थ है. लोग डिब्बा बंद पानी पीने को विवश हैं. स्थिति तो यह बन गयी है कि प्रतिमाह हजारों रुपये का पानी खरीद कर लोगों को पीना पड़ रहा है.
आयरनयुक्त पानी पी कर बीमार हो रहे लोग पीएचइडी विभाग है उदासीन
कहते हैं चिकित्सक
स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन सात से आठ लीटर पानी पीना चाहिए. पेट की अधिकतर बीमारियां दूषित जल पीने के कारण होती है. यहां के पानी में आयरन की मात्रा अधिक है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.
डॉ प्रेम कुमार, चिकित्सक
कहते हैं अधिकारी
शहर के पाइप लाइन को दुरुस्त करने की व्यवस्था की जा रही है. इसके लिए राज्य स्तर पर स्टीमेट बनाकर भेजा गया है. स्वीकृति मिलने के बाद शहर के पाइपलाइन दुरुस्त किया जायेगा.
अली हैदर, एसडीओ, पीएचइडी
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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