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बिहार : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव पर अस्पताल, नौका पर ही मिलेंगी सभी जरूरी दवाइयां

Updated at : 28 Jul 2017 7:31 PM (IST)
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बिहार : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव पर अस्पताल, नौका पर ही मिलेंगी सभी जरूरी दवाइयां

खगड़िया (गोगरी) : पिछले सीजन में बाढ़ की विभीषिका के दौरान स्वास्थ्य संबंधी उत्पन्न हुई समस्याओं से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले को बाढ़ पूर्व तैयारियां मुकम्मल कर लेने का निर्देश दिया है. बिहार सरकार के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य विभाग इस बार बाढ़ से घिरी आबादी तक पहुंच कर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया […]

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खगड़िया (गोगरी) : पिछले सीजन में बाढ़ की विभीषिका के दौरान स्वास्थ्य संबंधी उत्पन्न हुई समस्याओं से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले को बाढ़ पूर्व तैयारियां मुकम्मल कर लेने का निर्देश दिया है. बिहार सरकार के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य विभाग इस बार बाढ़ से घिरी आबादी तक पहुंच कर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की तैयारी शुरू कर दी है. बाढ़ के दौरान लोगों को इलाज के लिए अस्पताल अथवा लगाये गये शिविर में आने के लिए जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी.

मेडिकल स्टाफ खुद ही वहां पहुंच कर लोगों का इलाज करेंगे. बाढ़ ग्रसित क्षेत्र में इस बार नौका अस्पताल, नौका औषधालय, नौका एंबुलेंस दौड़ता हुआ नजर आयेगा. गर्भवती महिलाओं के प्रसव के लिए नौका अस्पताल में मेटरनिटी हट डिलेवरी किट की व्यवस्था रहेगी. जहां जरूरत होगी, वहीं मेटरनिटी हट (नाव पर लगनेवाली प्रसव झोपड़ी) लगा कर प्रशिक्षित महिला नर्स अथवा डॉक्टर महिलाओं की डिलेवरी करायेंगी.

जरूरत पड़ने पर नौका एंबुलेंस की सुविधा
बाढ़ के दौरान भोजन, पानी से कहीं ज्यादा इलाज और दवाओं की समस्या उत्पन्न होती है. शुद्ध पेयजल के अभाव में डायरिया, जलजनित बीमारी के अलावा महामारी, सांप-बिच्छुओं के काटने से बाढ़ से घिरे लोग काल-कलवित होते हैं. बाढ़ से बुरी तरह घिरे लोगों को राहत शिविर में लगे हेल्थ कैंप अथवा अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल होता है. नावों के लिए मारामारी की स्थिति रहती है. इन परेशानियों को देखते हुए इस बार नौका एंबुलेंस, नौका अस्पताल, नौका औषधालय की कई टीम बाढ़ पीड़ित इलाकों में सक्रिय रहेगी. बाढ़ से घिरी आबादी के बीच जा कर मेडिकल स्टाफ मरीजों का इलाज करेंगे और उन्हें दवाइयां देंगे.

बाढ़ पूर्व तैयारियों में जुटा स्वास्थ्य विभाग
डीएम के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य विभाग बाढ़ से उत्पन्न होनेवाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निबटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. लोगों का इलाज लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित इलाकों के लिए अलग-अलग मेडिकल टीमें गठित की जा रही हैं. बाढ़ के दौरान संभावित बीमारियों के इलाज के लिए पूर्व के अनुभवों के आधार पर ओआरएस, पांच प्रतिशत ग्लूकोज स्लाइन, एनएस, रिंगर लैक्टेट, कोट्राइमेक्साजोल, टेट्रासाइक्लिन, इरीथ्रीमाइसीन, मेट्रोनिडाजोल, फ्यूराजोलीडीन, मेबेंडाजोल, एंटी इमेटिन दवा, ट्रांसफ्यूजन सेट, कॉटन, स्प्रीट, डेक्सामेथासोन, सर्पदंश के उपचार के लिए एएसवीएस, नवजात शिशुओं के लिए नियमित टीकाकरण की व्यवस्था, डिलेवरी किट, मैटरनिटी हट, कुत्ता, सियार काटने के उपचार के एंटी रेविज वैक्सिन आदि जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.

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