सरकारी व गैर सरकारी छात्रावास में रह रहे छात्राें की परेशानी बढ़ी

Updated at : 13 Mar 2026 7:51 PM (IST)
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सरकारी व गैर सरकारी छात्रावास में रह रहे छात्राें की परेशानी बढ़ी

सरकारी व गैर सरकारी छात्रावास में रह रहे छात्राें की परेशानी बढ़ी

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-गैस की किल्लत की संभावना के बीच अब आमलोगों पर पड़ने लगा असर – 90 रुपए किलो की जगह 200 रुपया किलो किया जा रहा रिफिलिंग कटिहार गैस सिलेंडर की किल्लत की संभावना के बीच अब आमजनों पर असर पड़ने लगा है. हालांकि जिला प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि गैस भरपूर मात्रा में है. बावजूद गैस वितरकों के दुकानों पर अहले सुबह से ही गैस की पूर्जा कटाने को लेकर भीड़ लगनी शुरू हो जा रही है. तीसरे दिन भी कई गैस वितरकों के दुकान के सामने भीड़ लगी रही. गैस के लिए पूर्जा कटाने वाले की भीड़ को देखकर अब सबसे अधिक परेशानी का सामना सरकारी व गैर सरकारी छात्रावास व मेस चलाने वाले के समक्ष उत्पन्न होने की संभावना है. ऐसा छात्रावास में रह रहे छात्र व छात्राओं का कहना है. उनलोगों के समक्ष परेशानी इस तरह बढ़ गयी है कि गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण अब उनलोगों को खाने पर आफत आने वाली है. कई सरकारी संस्थानों के छात्रावास में रह रहे छात्राओं का कहना है कि दस दिन के अंदर अगर स्थिति नहीं सुधरी तो उनलोगों को छात्रावास छोड़कर कहीं घर न जाना पड़ जाये. किराये के मकान पर रहे रहे कई छात्र- छात्राओं का कहना है कि वे लोग खुद से खाना बनाकर पढाई करते हैं. इधर गैस की किल्लत होने की वजह से उनलोगों की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगा है. कई छात्रों का कहना है कि चार दिन पूर्व जहां छोटा सिलेंडर 90 रूपये प्रतिकिलो गैस रिफलिंग करवाते थे. अब उसी सिलेंडर को रिफिलिंग कराने में दो सौ रूपये प्रतिकिलो देना पड़ रहा है. वो भी काफी मान मनौव्वल करने के बाद. कई छात्रों का कहना है कि गैस की किल्लत हो या नहीं लेकिन चाय, याट व समोसा के दामों में वृद्धि कर दिया गया है. इससे अब उनलोगों को पॉकेट पर भी असर पड़ने लगा है. उनलोगों की माने तो आसपास के दुकानों में जहां पूर्व में समोसे दस रूपये बिक रहे थे. अब बारह रूपये दिये जा रहे हैं. चाट जहां पच्चीस रूपये थे. अब तीस रूपये दिये जा रहे हैं. इतना ही नहीं दस रूपये की चाय के लिए अब बारह रूपये लिये जा रहे हैं. कुल मिलाकर पॉकेट पर अब अतिरिक्त मार पड़ रही है. एजेंसी व गोदाम का लगाना पड़ रहा चक्कर कई उपभोक्ताओं की माने तो पहले तो अहले सुबह एजेंसी का चक्कर लगाना पड़ रहा है. करीब दो तीन घंटे कतार में लग कर किसी तरह पर्ची कटाते हैं. पुन: गोदाम में गैस उठाव के लिए घंटो कतारबद्ध होना पड़ता है. तब जाकर कहीं उनलोगों को गैस उपलब्ध हो रहा है. कई उपभोक्ताओं ने बताया कि शुक्रवार को सुबह साढ़े सात बजे से ही कार्यालय के समीप लाइन में लगकर पर्चा कटवाने की विवशता रही. यह कतार करीब दो बजे के बाद समाप्त हो पाया. हालांकि गैस वितरकों का कहना है कि गैस की गाडी समय पर आ जाने से उपभोक्ताओं को आसानी से गैस उपलब्ध करवा दिया जा रहा है. कॉमसियल सिलेंडर की आपूर्ति बंद है.

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