नदी ने पहले छीनी पुश्तैनी जमीन, अब रेलवे की कार्रवाई से बेघर हुए परिवार

डीएम को ज्ञापन देने पहुंचीं महिलाएं। | Prabhat Khabar Network
कटिहार में रेलवे की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद बेघर हुए परिवारों ने डीएम से पुनर्वास और सरकारी जमीन की मांग की है। जानें पूरी खबर।
कटिहार के पूर्वी बारीनगर की दर्जनों महिलाएं शनिवार को मुखिया प्रतिनिधि मंसूर आलम के नेतृत्व में समाहरणालय पहुंचीं. उन्होंने जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास, सरकारी जमीन उपलब्ध कराने और प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य आवासीय योजना के तहत घर स्वीकृत करने की मांग की.
रेलवे कार्रवाई के बाद खुले आसमान के नीचे जीवन
महिलाओं ने बताया कि दो जुलाई को रेलवे प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में उनके आशियाने तोड़ दिए गए. इसके बाद से कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ बिना स्थायी ठिकाने के जीवन बिताना बेहद कठिन हो गया है.
नदी कटाव के बाद रेलवे जमीन पर लिया था सहारा
मुखिया प्रतिनिधि मंसूर आलम ने बताया कि करीब 35 वर्ष पहले नदी कटाव में इन परिवारों की पुश्तैनी जमीन पूरी तरह बह गई थी. इसके बाद जीविका और रहने की मजबूरी में करीब 20 वर्ष पहले परिवारों ने रेलवे की खाली जमीन पर झोपड़ियां बनाकर आश्रय लिया था. वर्षों तक वहीं रहने के बाद रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर सभी झोपड़ियों को हटा दिया, जिससे कई परिवार पूरी तरह बेघर हो गए.
सरकारी जमीन और आवास योजना की मांग
ज्ञापन में महिलाओं ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे न तो जमीन खरीद सकती हैं और न ही अपना मकान बना सकती हैं. उन्होंने सरकार से मानवीय आधार पर सरकारी जमीन उपलब्ध कराने और प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य आवासीय योजना के तहत आवास स्वीकृत करने की मांग की, ताकि परिवारों को स्थायी आश्रय मिल सके.
प्रशासन से राहत की उम्मीद
प्रभावित परिवारों की निगाहें अब जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं. पीड़ितों को उम्मीद है कि उनकी परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन शीघ्र राहत एवं पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाएगा.
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लेखक के बारे में
By रुपेश कुमार
रुपेश कुमार 15 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हैं. कानून से जुड़ी खबरों का संकलन करते हैं.
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