दीपावली नजदीक आने के साथ कुम्हारों के चाक ने पकड़ी रफ्तार
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 17 Oct 2024 10:46 PM
मिट्टी का दीया व अन्य सामग्री बनाने में जुटे कुम्हार
कोढ़ा. दीपावली त्योहार की आहट होते ही कुम्हारों के चाक गति पकड़ने लगी है. कुम्हार वर्ग में एक आशा और एक खुशी देखी जा रही है. कुम्हार के चेहरों पर खुशी इसलिए है कि उन्हें उम्मीद है कि इस वर्ष लोग चाइनीज बॉल व समानों की खरीदारी नहीं करेंगे. दीपों का पर्व दीपावली पर मिट्टी का दीया जलाने की परंपरा काफी पुरानी है. रोशनी के इस महापर्व को दीपोत्सव का त्यौहार कहते हैं. बड़े ही हर्षोल्लास के साथ दीपोत्सव त्योहार मनाया जाता है. मकान की छत की मुंडेर पर कतार से सजी दीपों के मनमोहक श्रृंखला मन को काफी भाती है. पिछले कुछ वर्षों से दीपोत्सव के त्यौहार में बदलाव व आधुनिकता की आंधी ने इस परंपरा को भी अब बदल कर रख दी है. बिजली की चकाचौंध रोशनी ने दीप व दीपावली के रिश्ते को कमजोर जरूर कर दिया. दीपावली पर्व के अवसर पर घरों में दीप जलाए जाते थे. पर अब बिजली के झालरदार बल्ब जलाने का रिवाज चल पड़ा है. बिजली-बत्ती की चकाचौंध””””””””के आगे दीये दीप की लौ कमजोर पड़ गयी है. नयी पीढ़ी दीप-दीये को अब बीते जमाने की बात कहने लगे थे. दीपावली के मौके पर मिट्टी के दीये जलाए जाते थे. अब चाइनीज झालर जलाये जाते हैं. मिट्टी के दीए की जगह लोग बिजली की फैंसी लाइट का उपयोग करने लगे हैं. कोढ़ा प्रखंड के विभिन्न बाजारों व चौक पर रेडीमेड के रिवाज चल पड़ा है. जिस कारण बाजारों में सस्ती व सुविधाजनक फैंसी लाइटों का कब्जा हो गया है. लेकिन इस बार कोढ़ा प्रखंड वासियों ने चाइनीज लाइटों का जमकर विरोध कर कुम्हारों द्वारा बनाये गये मिट्टी के दीप-दीये जलाने का मन बना लिया है. लोग बाग अभी से अपने घरों दुकानों व प्रतिष्ठानों की साफ सफाई में जुट चुके हैं. जबकि दीपावली के मौके पर होने वाले काली पूजा को लेकर मंदिरों में साज सज्जा का काम भी परवान पर है. मिट्टी का दिया बनाने वाले रामचंद्र पंडित, शकुंतला देवी समेत कई कुम्हारों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बेहतर मिट्टी की कीमत भी बढ़ गया है. उसके हिसाब से जो लाभ हमलोगों को प्राप्त होनी चाहिए वह नहीं हो पाता है. बावजूद इसके हम अपनी पुश्तैनी धंधा व दीपावली के परंपराओं का निर्वाह का ध्यान रखते हुए पूरे मनोयोग से दीप बनाकर ग्राहकों को उपलब्ध करते हैं. कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में भी खरीदारी के लिए चहल -पहल शुरू हो गयी है.
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