डिजिटल इंडिया के दावों के बीच फर्श पर परीक्षा दे रहीं बेटियां, कटिहार के स्कूल की बदहाल तस्वीर

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डिजिटल इंडिया के दावों के बीच फर्श पर परीक्षा दे रहीं बेटियां, कटिहार के स्कूल की बदहाल तस्वीर

Katihar News: कटिहार के अमदाबाद के प्लस-टू प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय में 540 छात्राओं के लिए सिर्फ चार कमरे. फर्श पर परीक्षा, शुद्ध पानी और शिक्षकों की भी कमी.

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कटिहार के अमदाबाद से मनोज कुमार की रिपोर्ट

Katihar News: एक तरफ डिजिटल क्लासरूम, स्मार्ट बोर्ड और आधुनिक शिक्षा के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर कटिहार के अमदाबाद की यह तस्वीर सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. यहां 540 छात्राओं वाला प्लस-टू स्कूल आज भी अपने भवन का इंतजार कर रहा है. हालत यह है कि छात्राएं फर्श पर बैठकर पढ़ाई और परीक्षा देने को मजबूर हैं.

सरकार लगातार बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने की बात करती है. लेकिन अमदाबाद प्रखंड के प्लस-टू प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय की स्थिति इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है. यहां छात्राओं को जर्जर भवन में बेहद सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है.

कागजों पर बना प्लस-टू स्कूल, जमीन पर नहीं बदली तस्वीर

विद्यालय को विभाग ने प्लस-टू का दर्जा तो दे दिया, लेकिन आज तक इसका अपना भवन नहीं बन सका. फिलहाल स्कूल का संचालन इन्द्रावती उच्च विद्यालय के पुराने और जर्जर परिसर में किया जा रहा है.

विद्यालय में कुल 540 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन पढ़ाई और परीक्षा के लिए केवल चार कमरे उपलब्ध हैं. दो अन्य कमरों में कंप्यूटर लैब और कार्यालय संचालित होता है. जगह की कमी के कारण कई छात्राओं को फर्श पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ती है.

540 छात्राएं, चार कमरे… कैसे चलेगी पढ़ाई?

स्कूल की पुरानी इमारत अब खंडहर जैसी हो चुकी है. परिसर का एक हिस्सा स्थानीय पशुओं के ठहरने की जगह बन गया है. ऐसे माहौल में छात्राओं को पढ़ाई करनी पड़ रही है.

संसाधनों की कमी का असर पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है. विषयवार शिक्षकों की कमी के कारण नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

Katihar News: ‘जमीन पर बैठते हैं, आयरन वाला पानी पीते हैं’

परीक्षा देकर बाहर निकली छात्राएं कशिश परवीन, भवानी प्रिया, इशरत परवीन, प्रीति कुमारी, सिमी कुमारी, तनु कुमारी और सफिया चांद ने अपनी परेशानियां साझा कीं.

छात्राओं ने बताया कि प्लस-टू स्कूल बनने के बावजूद उन्हें आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ना और परीक्षा देनी पड़ती है. स्कूल के शौचालय की हालत बेहद खराब है. पूरे परिसर में सिर्फ एक चापाकल है, जिससे आयरनयुक्त पानी निकलता है. इसके अलावा कई विषयों के शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं.

उनका कहना है कि बेहतर सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा है.

प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा

इस मामले पर बीडीओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रणवीर कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है. उन्होंने बताया कि शौचालय, बेंच-डेस्क, शुद्ध पेयजल और शिक्षकों की कमी से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों को भेजी जा रही है.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द आवश्यक कदम उठाकर छात्राओं को बेहतर और गरिमापूर्ण शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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