1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद कटिहार में बीमारी का था प्रकोर

Updated at : 08 May 2025 7:09 PM (IST)
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1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद कटिहार में बीमारी का था प्रकोर

1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद कटिहार में बीमारी का था प्रकोर

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– युद्ध में चली गोली बारूद के प्रदूषण से शहरवासियों के फूल गये थे आंख – काला चश्मा शहर में पड़ गया था कम, चिकित्सक थे हैरान कटिहार पहलगाम आतंकी हमला के बाद भारत की ओर से करारा जबाब से भारत- पाकिस्तान के बीच युद्ध की संभावना के बीच लोग उत्साहित हैं. इस बीच 1971 में भारत व पूर्वी पाकिस्तान के बीच हुई युद्ध को याद कर लोग सिहर जा रहे हैं. तब के बड़ा बाजार निवासी सह व्यवसायी राम सिंहासन चौहान 1971 में भारत पूर्वी पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद कटिहार में बीमारी के प्रकोप को याद कर मर्माहत हो गये. उनका कहना है कि 1971 में हुए भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध को लेकर लोगों में काफी उत्साह था. भारत के वीर जवानों की ओर से अदम्य शौर्य प्रदर्शन के बाद बंग्लादेश को अलग कराया जा सका. युद्ध समाप्ति के बाद कटिहार जिले में जो बीमारी का मंजर था वह आज भी अविस्मरणीय है. तब चिकित्सकों की संख्या काफी कम थी. लोग दवा दुकानों पर जाकर अपनी समस्याओं को बताकर दवा ले पाते थे. युद्ध के बाद प्रदूषण का ऐसा मंजर चला कि आंख की बीमारी, हैजा के सामान नजर आया. कटिहार जिले का एक भी लोग नहीं थे. जिनका प्रदूषण का असर से आंख खराब नहीं हो गयी थी. एक का आंख फूलने भर देरी थी कि देखादेखी सभी शहरवासियों की आंख फूल कर मोटा हो गया था. शहर से गुगल काला चश्मा भी कम पड़ गये थे. यह बीमारी करीब एक व्यक्ति को कम से कम दस से पन्द्रह दिन तक रहती थी. इसका एक ही उपाय था आंख में पानी मारते मारते सही हो पाता. बीमारी इस कदर फैल गयी थी कि अगर एक की आंख में परेशानी होती तो केवल उसे देख लेने भर दूसरे का भी आंख खराब हो जाता. वे बताते हैं कि लोग रायगंज व आसपास के इलाके में जाना बंद कर दिया था. उनकी माने तो तब के युद्ध के समय विपक्षी भी एकजुट था. आज युद्ध को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. जरूरत है एकजुट होकर सरकार के मनोबल को बढ़ाया जाये.

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