ओवरब्रिज के किनारे की झुग्गियां तोड़ी व सैकड़ों दुकानों को हटाया

Updated at : 12 Feb 2020 5:28 AM (IST)
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ओवरब्रिज के किनारे की झुग्गियां तोड़ी व सैकड़ों दुकानों को हटाया

कटिहार : आरपीएफ कमांडेट के निर्देश पर आरपीएफ ने सोमवार को ओवरब्रिज की एक ओर लोगों द्वारा अतिक्रमित कर रखी जमीन एवं दुकानों को अतिक्रमणकरियों से मुक्त कराया. आरपीएफ कमांडेट राजेंद्र बाबू के निर्देश पर आरपीएफ निरीक्षक एसएस मीणा सहित अन्य आरपीएफ ने ओवर ब्रिज की एक भाग की ओर स्थानीय लोगों एवं दुकान दोनों […]

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कटिहार : आरपीएफ कमांडेट के निर्देश पर आरपीएफ ने सोमवार को ओवरब्रिज की एक ओर लोगों द्वारा अतिक्रमित कर रखी जमीन एवं दुकानों को अतिक्रमणकरियों से मुक्त कराया.

आरपीएफ कमांडेट राजेंद्र बाबू के निर्देश पर आरपीएफ निरीक्षक एसएस मीणा सहित अन्य आरपीएफ ने ओवर ब्रिज की एक भाग की ओर स्थानीय लोगों एवं दुकान दोनों ने रेलवे की जगह को अतिक्रमित कर रखी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया.
रेलवे की जमीन को अतिक्रमणकारियों से छुड़ाने के लिए आरपीएफ ने हल्का बल का प्रयोग करते हुए ओवर ब्रिज की एक ओर की जमीन को खाली कराया. इस क्रम में तकरीबन एक दर्जन परिवारों के झुग्गी झोपड़ी को हटाते हुए उक्त जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया.
ओवर ब्रिज से लेकर जीआरपी चौक तक एक ओर अतिक्रमणकारियो ने कहीं झुग्गी डाल रखी तो कुछ ने अपनी दुकान लगाकर रखा था. जिसे आरपीएफ ने झुग्गी में चल रहे दुकान एवं गुमटी को वहां से हटाते हुए जगह को अतिक्रमण मुक्त कराया. बताते चले कि कटिहार मनिहारी टर्मिनल रेलवे स्टेशन के पश्चिम भाग में दर्जनों परिवार का एक मुहल्ला सिंगल टोला हुआ करता था.
जिसमें अधिकांश सफाई कर्मी निवास करते थे. वर्षो से उन लोगों ने रेलवे की जमीन को अतिक्रमण कर अपनी झुग्गी झोपड़ी डाल कर एक मुहल्ला बना रखा था. कुछ लोगों की कई पीढ़िया सदियों से वहां रहते आ रहे थे. इस बीच वहां रेलवे को वहां ब्रीज निर्माण का कार्य कराना था.
जिसे लेकर छह माह पूर्व रेलवे अधिकारी के निर्देश पर रेलवे ने स्थानीय पुलिस एवं आरपीएफ एवं जीआरपी के सहयोग से सिंगल टोला की झुग्गी, झोपड़ी व घर बनाये रखे लोगों के घरों पर जेसीबी चलाकर, रेलवे ने जगह हो अतिक्रमण मुक्त कराया. वहां चल रहे ओवरब्रिज निर्माणाधीन कार्य को लेकर रेलवे ने खाली जगह को घेराव कर दिया.
लेकिन रेलवे की घेराव के बाद भी शेष बचे जमीन यानि ओवरब्रिज के किनारे किसी प्रकार एक दर्जन से भी अधिक परिवार किसी प्रकार अपनी झोपड़ी झुग्गी खड़ी कर वहां रह रहे थे. इसी बीच रेलवे ने पुन: उस जमीन को झुग्गी झोपड़ी को हटाते हुए उस जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया. जिससे यह सभी लोग ओवरब्रिज के फुटपाथ पर आ गये है.
प्रशासनिक अधिकारी ने नहीं ली गरीबों की सुध
सर्द ऋतु में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलता है कि लोग सर्द से बताने के लिए अपने पालतु पशुओं को गर्म कप़डे पहना देते है. साथ ही उसके लिए आग की व्यवस्था कर देते है.
लेकिन ओवर ब्रिज के किनारे तकरीबन छह माह से भी अधिक समय से ठंड काट रहे एक दर्जन से भी अधिक लोगों को किसी प्रकार की सहायता उपलब्ध नहीं करा पायी जिला प्रशासन. बताते चले कि ओवर ब्रिज रेलवे की जमीन पर है.
ओवरब्रीज के डिभाईड के उस पार की खाली जमीन पर एक दर्जन से भी अधिक परिवार किसी प्रकार अपना झुग्गी झोपड़ी डालकर आशियाना बना रखे थे. गर्मी, बरसात तथा सर्द ऋतु भी किसी प्रकार उन लोगों ने ओवरब्रिज के किनारे ही काट दिये. सर्द की रात में जब लोगों का छत के नीचे ठंड व रूम हीटर की आवश्यकता होती थी.
उस समय भी वह परिवार झुग्गी एवं उसके बाहर अपने नौनिहालों को लेकर ओवरब्रीज के फुटपाथ पर ही कंबल ताने सोते थे. इस दरम्यान उसके साथ कभी भी कोई अनहोनी घटना घट सकती थी. लेकिन वह सभी उसी प्रकार अपनी जीवन व्यतीत कर रहे थे. दुर्गापूजा से लेकर महापर्व उनलोगों की उसी प्रकार सड़क के किनारे समाप्त हो गयी. लेकिन पुन: उन लोगों पर अतिक्रमण का डंडा चला और उसकी झुग्गी झोपड़ी टूट गयी.
जिस कारण सभी समान लेकर ओवरब्रीज फुटपाथ पर आ गये. ठंड समाप्ती के दौर पर है लेकिन रात्री प्रहर में सिहरन बढ़ जाती है. ऐसे में उनके पास झुग्गी भी नही रही कि वह अपना तथा अपने परिजनों सर छिपा सके. दूसरी ओर प्रशासन की ओर से भी उन लोगों की सहायता में कोई मदद नही मिल पा रही है.
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